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*मालूद के पास भीषण हादसा: तीन घायल, एम्बुलेंस देरी ने बढ़ाई मुश्किलें*…… *सड़क हादसे के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था बेनकाब: समय पर नहीं मिली एम्बुलेंस, तीन घायल*…… *मालूद हादसा: एम्बुलेंस की देरी और अस्पताल की लापरवाही से उठे सवाल* …… *तीन जिंदगियां संकट में: मालूद हादसे ने खोली स्वास्थ्य सेवाओं की पोल*…..

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ग्राम मालूद के पास भीषण सड़क हादसा: तीन घायल, एम्बुलेंस देरी और इलाज में लापरवाही से भड़का जनआक्रोश

रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया-किल्लौद, 24 अप्रैल 2026।
ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम मालूद के पास शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें मोटरसाइकिल सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में आनंद राठौड़ (18 वर्ष), संदीप (17 वर्ष) और आयुष (8 वर्ष) शामिल हैं। हादसे के बाद जो हालात सामने आए, उन्होंने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एम्बुलेंस नहीं पहुंची, दोपहिया से अस्पताल ले जाना पड़ा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद 108 एम्बुलेंस सेवा को कॉल किया गया, लेकिन समय पर एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकी। स्थिति गंभीर होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों ने घायलों को मजबूरी में दोपहिया वाहनों के जरिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किल्लौद पहुंचाया।

अस्पताल में भी नहीं मिली राहत

अस्पताल पहुंचने के बाद भी घायलों को तुरंत और समुचित उपचार नहीं मिल पाया। सूचना पर पहुंचे एडवोकेट सुनील राठौड़ ने बताया कि करीब एक घंटे तक घायलों को सिर्फ सामान्य इंजेक्शन देकर छोड़ दिया गया, जिससे हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
जब दोबारा एम्बुलेंस के लिए संपर्क किया गया, तो 1 से 2 घंटे का इंतजार बताया गया। अंततः एडवोकेट राठौड़ ने निजी वाहन की व्यवस्था कर घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया।

स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुली

इस घटना ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। न समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध हो पाई, न ही अस्पताल में तत्काल इलाज—जिससे आम जनता, खासकर गरीब वर्ग, को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लोगों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है। उन्होंने प्रशासन से स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार की मांग की है।
एडवोकेट सुनील राठौड़, जो पहले भी इन मुद्दों को उठा चुके हैं, ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

अस्पताल में मची अफरा-तफरी

घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि क्षेत्र की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था का आईना बन गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है।

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