*श्रद्धा और संयम का महापर्व: आयंबिल ओली तप की गूंज, बरखा श्रीमाल ने बताया आध्यात्मिक महत्व*…… ……….. *श्री श्वेतांबर जैन समाज के श्रावक प्रतिष्ठित व्यापारी सुगन भंडारी की बेटी है बरखा श्रीमाल* * …… *आत्मशुद्धि की अनूठी साधना: आयंबिल ओली तप का महत्व, बरखा श्रीमाल ने किया विस्तृत वर्णन*…… *(देखे वीडियो)* ….. *नौ दिन का कठिन तप, आत्मा का उत्थान: आयंबिल ओली पर बरखा श्रीमाल की खास बातचीत*…. …… *(देखे वीडियो)* ……. *


आयंबिल ओली की तप साधना: श्रद्धा, संयम और आत्मशुद्धि का अनुपम पर्व बरखा श्रीमाल ने बताया तप का महत्व
रिपोर्ट: यश पांडे
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खिरकिया| चैत्र मास के पावन अवसर पर जैन समाज में मनाई जाने वाली आयंबिल ओली तप साधना को लेकर नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी श्री श्वेतांबर जैन समाज के श्रावक सुगन भंडारी एवं उनकी पुत्री श्रीमती बरखा श्रीमाल ने विशेष बातचीत में इस कठिन तपस्या के महत्व और विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सुगन भंडारी ने बताया कि आयंबिल ओली जैन धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कठोर तप साधना है, जिसमें श्रद्धालु आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष नियमों का पालन करते हैं। श्रीमती सरोज सुगन भंडारी ने बताया यह तप वर्ष में दो बार चैत्र और आश्विन मास में किया जाता है, जिसमें नौ दिनों तक लगातार आयंबिल किया जाता है।
बरखा श्रीमाल ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि आयंबिल का अर्थ है ऐसा आहार ग्रहण करना जिसमें स्वाद, मसाले और तामसिक तत्वों का पूर्ण त्याग किया जाता है। तपस्वी दिन में केवल एक समय सादा भोजन करते हैं, जिसमें उबालकर तैयार किया गया निरस भोजन लिया जाता है। इसमें नमक, घी, तेल, हरी सब्जियां, फल आदि का भी परहेज किया जाता है, जिससे इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
उन्होंने आगे बताया कि यह तप केवल आहार तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें मन, वचन और कर्म की शुद्धि भी अत्यंत आवश्यक होती है। तपस्वी इन नौ दिनों में जप, तप, स्वाध्याय, पूजा-अर्चना और ध्यान में अधिक समय व्यतीत करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजन, विधान और आराधना का आयोजन होता है, जिससे पूरे वातावरण में धर्ममय ऊर्जा का संचार होता है।
बरखा श्रीमाल ने कहा कि चैत्र मास को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, क्योंकि इस समय प्रकृति में भी नवचेतना का संचार होता है। ऐसे में आयंबिल ओली की तपस्या करने से आत्मा की शुद्धि के साथ-साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है।
सुगन भंडारी ने बताया कि इस तप को करना आसान नहीं होता, लेकिन दृढ़ संकल्प और आस्था के साथ साधक इसे पूर्ण करते हैं। तप के दौरान संयम, सहनशीलता और नियमों का कड़ाई से पालन करना पड़ता है, जिससे व्यक्ति अपने अंदर की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त कर सकता है।
अंत में दोनों ने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में आयंबिल ओली की आराधना से जुड़ें और अपने जीवन को धर्ममय बनाएं।




