*गुमनाम पर्चे से ‘संघर्ष’ या शहर में फैलाया जा रहा भ्रम?*….. *बिना नाम-पते का विरोध: क्या यह सच्ची आवाज़ या छुपी साजिश?*….. *ROB पर विरोध या अफवाह?*….. *संघर्ष के नाम पर गुमनामी: आखिर सामने क्यों नहीं आते विरोधी?* *छुपकर विरोध क्यों? पर्चे की सच्चाई पर उठे बड़े सवाल*…. *बिना पहचान का ‘संघर्ष’: क्या जनता को गुमराह किया जा रहा है?* ….. *न नाम, न जिम्मेदारी फिर कैसा विरोध?* *ROB विवाद: गुमनाम पर्चे से गरमाया माहौल, मंशा पर सवाल*….


*संघर्ष या छुपा हुआ भ्रम?*
रिपोर्ट:यश पांडे

शहर में प्रस्तावित ROB को लेकर इन दिनों एक पर्चा सोशल मीडिया और गलियों में घूम रहा है। सवाल ये नहीं कि कोई विरोध कर रहा है लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। सवाल ये है कि कैसे रखा जा रहा है।
बिना किसी नाम, बिना किसी जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान, बिना मुद्रक या प्रकाशक की जानकारी के इस तरह पर्चे बांटना आखिर क्या दर्शाता है? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसे एक नाबालिग बच्चे द्वारा बांटा जाना और भी चिंताजनक है।
अगर वास्तव में कोई समस्या है, कोई पीड़ा है, कोई न्याय की मांग है तो सामने आकर बात रखी जानी चाहिए।
जनता के बीच पारदर्शिता होनी चाहिए। छुपकर, गुमनाम रहकर “संघर्ष” की बात करना कितना उचित है?
अगर कोई ROB को लेकर असंतुष्ट है तो ओर अपनी बात रखना चाहता है तो हम उसका भी पक्ष रखेंगे*
क्या ऐसे पर्चे सच में आम जनता की आवाज़ हैं?
या फिर कुछ लोगों द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम?
हम किसी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बना रहे। अगर इस पर्चे के पीछे कोई है और अपनी बात रखना चाहता है, तो उसका पक्ष भी खुले मंच पर रखा जाएगा।
लेकिन एक बात साफ है
विकास पर बहस होनी चाहिए, भ्रम नहीं फैलाया जाना चाहिए।




