*48 दीपों के साथ सम्पन्न हुआ श्री भक्ताम्बर विधान का भव्य आयोजन*…… *देखे वीडियो*


48 दीपों के साथ सम्पन्न हुआ श्री भक्ताम्बर विधान का भव्य आयोजन
रिपोर्ट:यश पांडे
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खिरकिया। भक्ति और श्रद्धा के संगम के साथ स्थानीय दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर में रविवार को श्री भक्ताम्बर विधान का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास एवं धर्म-प्रभावना के साथ संपन्न हुआ। इस मांगलिक अवसर पर समूचा मंदिर परिसर आचार्य मानतुंग महाराज द्वारा रचित भक्ताम्बर महास्तोत्र की पवित्र ध्वनियों से गुंजायमान हो उठा।भक्ताम्बर विधान की महिमा इसके 48 काव्यों में समाहित है। कार्यक्रम के दौरान 48 दीपों के माध्यम से आराधना की गई, जो न केवल बाहरी अंधकार को दूर करते हैं, बल्कि आत्मा के भीतर व्याप्त मोह और अज्ञान के तिमिर का भी शमन करते हैं। प्रत्येक दीप एक काव्य की शक्ति और उसके पीछे छिपी ऋद्धि-सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं ने पूर्ण अनुशासन और भाव-विभोर होकर विधान की वेदी पर दीप समर्पित किए।
विधान की महिमा और धार्मिक महत्व
विधान की संपूर्ण प्रक्रिया ब्रह्मचारी अभिषेक जिम्मी भैया के कुशल सान्निध्य में संपन्न हुई। उन्होंने भक्ताम्बर स्तोत्र की महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भक्ताम्बर स्तोत्र मात्र एक काव्य नहीं, बल्कि साक्षात चमत्कारिक मंत्र है। इसके 48 छंदों का सस्वर पाठ और दीप आराधना करने से असाध्य रोगों का नाश, संकटों का निवारण और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।इस भव्य आयोजन के मुख्य लाभार्थी श्रीमती संतोष देवी जैन (चंदौरिया परिवार) रहे। परिवार ने विधि-विधान के साथ पूजन कर धर्म लाभ लिया।विधान के दौरान जैन समाज के महिला एवं पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। श्वेत वस्त्रों में पुरुष और केसरिया/गुलाबी परिधानों में सजी महिलाओं ने भक्ति नृत्य और जयकारों के साथ वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों ने सामूहिक आरती की और मंगल आशीष प्राप्त किया। विधान का मुख्य आकर्षण 48 दीपों की आकर्षक सज्जा और अर्घ्य समर्पण था, वहीं समाज की सक्रिय सहभागिता और सामूहिक पाठ रहा।मंत्र शक्ति के माध्यम से विश्व शांति और आत्म-कल्याण की भावना समाहित रही।




