*शहीदों के सरताज गुरु अर्जुन देव जी को श्रद्धांजलि, खिरकिया में सजी सेवा और श्रद्धा की छबील*…… *अटूट आस्था और सेवा का संगम: गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी गुरुपर्व पर उमड़ी संगत* …….. *गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को नमन, अरदास, छबील और लंगर के साथ मनाया गुरुपर्व*


गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी गुरुपर्व पर सजी श्रद्धा की छबील, संगत ने किया नमन
रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया। सिख धर्म के पांचवें गुरु, शहीदों के सरताज एवं अद्वितीय त्याग और बलिदान के प्रतीक श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी गुरुपर्व के अवसर पर श्री गुरु सिंह सभा खिरकिया में गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

प्रातः 8:15 बजे श्री सहज पाठ साहिब जी की समाप्ति उपरांत ज्ञानी मोहकम सिंह जी ने गुरबाणी कीर्तन एवं कथा के माध्यम से गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को नमन किया। उन्होंने “जपयो जिन अर्जन देव गुरु तिन संकट जोन गरभ ना आयो” तथा “तेरा भाना मीठा लागे” शबदों का गायन करते हुए संगत को गुरु जी के त्याग, धैर्य और ईश्वर भक्ति से अवगत कराया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 1606 ईस्वी में मुगल शासक जहांगीर द्वारा गुरु अर्जुन देव जी को अमानवीय यातनाएं दी गईं। उन्हें गर्म तवे पर बैठाया गया तथा उनके शरीर पर तपती रेत डाली गई, लेकिन उन्होंने धर्म, सत्य और मानवता के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया तथा अद्वितीय शहादत प्राप्त कर इतिहास में अमर हो गए।
कार्यक्रम के दौरान समस्त मानवता के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं विश्व कल्याण के लिए अरदास की गई। इसके पश्चात संगत एवं आमजन के लिए छबील लगाकर शीतल शरबत वितरित किया गया। रात्रि में गुरु का लंगर आयोजित हुआ, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रेम एवं श्रद्धा के साथ लंगर ग्रहण किया।
गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार हरभजन सिंह भाटिया ने गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को नमन करते हुए कहा कि हमें गुरु साहिब द्वारा दिखाए गए सेवा, समर्पण, सत्य एवं मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए तथा दीन-दुखियों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
शहीदी गुरुपर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में संगतजन उपस्थित रहे और गुरु चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए।




