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*खंडवा जनसुनवाई में कलेक्टेड गए किसान पिता-पुत्र गिरफ्तार*……. … *प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी तक पहुंचा मामला रात में मिली जमानत* *(देखे वीडियो)*

खंडवा जनसुनवाई में हंगामा: किसान पिता-पुत्र गिरफ्तार, रात में जमानत पर रिहा

रिपोर्ट: यश पांडे

खंडवा, 6 मई 2026। मध्यप्रदेश के खंडवा जिला कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब जमीन विवाद से परेशान किसान पिता-पुत्र ने कलेक्टर के सामने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को आक्रोश में कुछ कह
दिया। घटना के बाद प्रशासन ने दोनों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया, हालांकि करीब छह घंटे बाद रात में जमानत पर रिहा कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार छैगांवमाखन क्षेत्र के ग्राम बरूड़ निवासी किसान रामनारायण कुमरावत अपने पुत्र श्याम कुमरावत के साथ जनसुनवाई में पहुंचे थे। उन्होंने कलेक्टर ऋषव गुप्ता के समक्ष जमीन तक पहुंचने वाले रास्ते के विवाद का मुद्दा उठाया। कलेक्टर द्वारा मामले को दिखवाने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद किसान आक्रोशित हो गया और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह आत्महत्या कर लेगा।

इसके बाद सभागार में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर पिता-पुत्र को बाहर निकाल दिया। बाहर आने के बाद किसान ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बताई, इसी दौरान सुरक्षाकर्मियों से कहासुनी और धक्का-मुक्की होने लगी। सूचना मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर मौके पर पहुंचे और दोनों को हिरासत में लेने के निर्देश दिए।

कोतवाली पुलिस ने दोनों को कस्टडी में लेकर शांतिभंग की धाराओं में मामला दर्ज किया और दोपहर बाद जेल भेज दिया। घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता कलेक्ट्रेट पहुंचे और जमानत की मांग की। उनका आरोप था कि प्रशासन जानबूझकर जमानत में देरी कर रहा है। विरोध स्वरूप कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना शुरू कर दिया।

मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंचने के बाद शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को जानकारी दी। बताया जा रहा है कि इसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और रात 8:35 बजे किसान पिता-पुत्र को जमानत दे दी गई।

सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने कहा कि दोनों जनसुनवाई में लगातार हंगामा कर रहे थे तथा अधिकारियों से मारपीट की स्थिति बन रही थी, इसलिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करना जरूरी था।

वहीं किसान रामनारायण कुमरावत का कहना है कि उसकी जमीन तक जाने वाले रास्ते का विवाद कई वर्षों से लंबित है। कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद स्थानीय स्तर पर आदेश का पालन नहीं हुआ। रास्ता बंद होने से उसकी जमीन तीन वर्षों से खाली पड़ी है, जिससे उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान ने कहा कि बार-बार शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होने से वह परेशान और निराश था।

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