*रातातलाई में नर्मदा सेवा का भव्य आयोजन, भंडारा-भजन और फाग उत्सव से गांव बना वृंदावन-बरसाना*….. *संत श्री दादा गुरु का नर्मदा परिक्रमावासियों की सेवा में जुटे पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल, रातातलाई में भक्ति और फाग उत्सव का संगम*…. *मां नर्मदा की सेवा में समर्पित रातातलाई, भंडारा-भजन और रंगों की होली से गूंजा गांव*…..


रातातलाई में नर्मदा परिक्रमावासियों की सेवा में जुटे कमल पटेल, भंडारा, भजन संध्या और फाग उत्सव से गांव बना वृंदावन-बरसाना
रिपोर्ट:यश पांडे


खिरकिया/रातातलाई।
मंगलवार को ग्राम रातातलाई में मां नर्मदा की अखंड सेवा और परम संत दादागुरु के पावन सान्निध्य में पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल को अपनी जन्मभूमि पर नर्मदा परिक्रमावासियों की सेवा का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर दादागुरु के आशीर्वाद से नर्मदा परिक्रमावासियों, साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं की सेवा के लिए विशाल भंडारा, भजन संध्या और फाग उत्सव का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। नर्मदा परिक्रमावासियों की सेवा को मां नर्मदा की आराधना मानते हुए श्रद्धा, समर्पण और सनातन संस्कारों के साथ सेवा कार्य किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने सेवा, त्याग और मानव कल्याण के संदेश को आत्मसात किया।
रात्रि में मां नर्मदा के परम भक्त और प्रसिद्ध भजन गायक प्रभुदयाल पवार (ग्राम जामली) एवं उनकी टीम ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिसे श्रद्धालुओं ने खूब सराहा। वहीं होली के पावन अवसर पर फूलों की होली खेली गई। बुधवार सुबह फाग उत्सव के दौरान दादागुरु, परिक्रमावासियों और भक्तों ने रंग-गुलाल के साथ होली खेली। इस दौरान पूरा गांव मानो वृंदावन और बरसाना की झलक प्रस्तुत करता नजर आया।
बताया गया कि परम संत दादागुरु की मां नर्मदा परिक्रमा का यह चौथा चरण है। इससे पहले तीसरे चरण में चारुवा स्थित भगवान गुप्तेश्वर की नगरी में 1800 दिन निराहार पूर्ण होने पर 1800 देव वृक्षों का रोपण किया गया था। साथ ही “मेरा गांव-मेरा तीर्थ” की संकल्पना को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक गांव को तीर्थ बनाने का संकल्प भी दिलाया गया।
परम संत दादागुरु ने कहा कि गंगा, यमुना, कावेरी, गोदावरी और नर्मदा जैसी नदियां केवल नदियां नहीं बल्कि शक्तियों का स्वरूप हैं। भारत उत्सवों का देश है और हर उत्सव समाज को एक सकारात्मक संदेश देता है। मां नर्मदा की कृपा और दादागुरु के आशीर्वाद से यह सेवा कार्य समाज में संस्कार, श्रद्धा और मानव सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।
कार्यक्रम के समापन पर परिक्रमावासी दादागुरु के साथ अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गए। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा से सभी पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हुए “नर्मदे हर, जीवन भर” का जयघोष किया।




