*मामा चला जायेगा तो बहुत याद आयेगा वाले बयान के बाद पीएम मोदी के कहने पर शिवराज सिंह चौहान गए थे गंगा किनारे*…… *(देखे वीडियो)*…… *एकांत में जाइए, मन शांत रखिए जब मुश्किल वक्त में मोदी के फोन ने बढ़ाया शिवराज चौहान का हौसला*…. *(देखे वीडियो)* ……. *चुनावी तनाव से पारिवारिक पलों तक… शिवराज ने किताब में बताए मोदी संग 35 साल पुराने रिश्तों के खास अनुभव*


मोदी-शिवराज के 35 साल के रिश्ते की कहानी: ‘जब लगा सब खत्म हो रहा, तभी आया प्रधानमंत्री का फोन… बोले- मुख्यमंत्री नहीं, अपने शिवराज से बात कर रहा हूं’
रिपोर्ट:यश पांडे

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भोपाल/दिल्ली। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 वर्षों के अनुभवों को अपनी पुस्तक “अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव” में संजोया है। इस पुस्तक में राजनीति के साथ-साथ कई ऐसे भावुक और रोचक प्रसंग शामिल हैं, जो नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान के बीच गहरे विश्वास और आत्मीय संबंधों को सामने लाते हैं।

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन हुआ। किताब में कई ऐसे किस्से शामिल हैं, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुए थे। इनमें चुनावी तनाव, कोरोना काल, परिवार के निजी पल, संगठन और कार्यकर्ताओं के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जुड़ाव जैसे कई पहलू शामिल हैं।
जानिए किताब के 10 खास किस्से…
1. “मैं मुख्यमंत्री नहीं, अपने शिवराज से बात कर रहा हूं”
2023 के विधानसभा चुनाव से पहले माहौल ऐसा बनाया जा रहा था कि शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक दौर खत्म होने वाला है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया। उन्होंने कहा “मैं मुख्यमंत्री से नहीं, अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।” इसके बाद उन्होंने कुछ समय एकांत में बिताकर मन को शांत रखने की सलाह दी। शिवराज लिखते हैं कि उस एक फोन ने उनका आत्मविश्वास फिर मजबूत कर दिया।
2. पहलगाम हमले के बाद दिखा शांत लेकिन मजबूत नेतृत्व
किताब में पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई मंत्रिमंडल बैठक का भी जिक्र है। शिवराज के मुताबिक पूरे देश में आक्रोश था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद संयमित थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस बार कार्रवाई अलग होगी और दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।
3. तकनीक को पहले ही समझने वाले नेता
1990 के दशक में जब ई-मेल और कंप्यूटर आम नहीं थे, तब नरेंद्र मोदी संगठन में तकनीक के उपयोग पर जोर दे रहे थे। एक बैठक में उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूछा था कि कितनों के पास ई-मेल पता है।
4. कोरोना में अस्पताल से पूछा हालचाल
कोरोना संक्रमण के दौरान जब शिवराज अस्पताल में भर्ती थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन कर उनका हाल जाना और इलाज से लेकर परिवार तक की चिंता की।
5. पिता के निधन पर सबसे पहले आई संवेदना
शिवराज सिंह चौहान ने किताब में लिखा कि पिता के निधन के समय सबसे पहला फोन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आया था। उन्होंने परिवार का हाल पूछा और ढांढस बंधाया।
6. बेटों की शादी में परिवार के मुखिया जैसा अपनापन
शिवराज परिवार सहित शादी का निमंत्रण देने पहुंचे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे परिवार के साथ आत्मीय बातचीत की। शादी समारोह में भी रिश्तेदारों से मिलकर हालचाल जाना।
7. “हवाई अड्डे मत आइए, निवेशकों के बीच रहिए”
एक बड़े आयोजन के बाद जब शिवराज प्रधानमंत्री को विदा करने जा रहे थे, तब नरेंद्र मोदी ने उन्हें रोकते हुए कहा कि निवेशकों के बीच रहिए, प्रदेश को उससे ज्यादा फायदा होगा।
8. वर्षों बाद भी पुराने कार्यकर्ता को पहचान लिया
एक सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्षों पुराने कार्यकर्ता को तुरंत पहचान लिया और मंच से उतरकर उनसे मिले। यह दृश्य सभी के लिए खास बन गया।
9. किसानों के हितों पर साफ संदेश
एक अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा कि किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
10. रेहड़ी-पटरी वालों को मिला सम्मान
किताब में बताया गया है कि छोटे व्यापारियों को सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि सम्मान और पहचान दिलाने की सोच भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थी।
शिवराज ने लिखा रिश्तों में स्नेह, नेतृत्व में दृढ़ता
पुस्तक अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव” में शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और बड़े भाई के रूप में प्रस्तुत किया है। इन अनुभवों में भरोसा, संवेदनशीलता और संगठन के प्रति समर्पण साफ दिखाई देता है।




