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*पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल को मिली बड़ी जिम्मेदारी, भाजपा संगठन ने जताया भरोसा* ….. *प्रदेश कार्यसमिति में मिला अहम स्थान* *भाजपा संगठन ने अनुभव ओर जमीनी पकड़ को दिया सम्मान, पूर्व मंत्री कमल पटेल बने प्रदेश कार्यसमिति के अहम सदस्य* ….. *किसान नेता कमल पटेल को प्रदेश कार्यसमिति में मिला महत्वपूर्ण दायित्व* …..

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में कमल पटेल को मिली बड़ी जिम्मेदारी, कार्यकर्ताओं में उत्साह

रिपोर्ट:यश पांडे

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा घोषित नई प्रदेश कार्यसमिति में पूर्व कृषि मंत्री एवं किसान नेता कमल पटेल को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने पर हरदा सहित आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है।

प्रदेश कार्यसमिति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल तथा वरिष्ठ नेता फग्गन सिंह कुलस्ते सहित प्रदेश के कई प्रमुख नेताओं को स्थान दिया गया है। वहीं 41 नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।

पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल लंबे समय से किसानों, कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच सक्रिय रहकर जनसेवा में जुटे हुए हैं। हरदा सहित आसपास की लगभग 10 विधानसभा क्षेत्रों में उनकी मजबूत जनाधार और संगठनात्मक पकड़ मानी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास एवं जनकल्याणकारी संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने तथा हरदा जिले को सिंचाई सुविधाओं से समृद्ध बनाने में उनके योगदान को विशेष रूप से याद किया जाता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने कमल पटेल को प्रदेश कार्यसमिति में महत्वपूर्ण स्थान देकर उनके अनुभव, संगठन क्षमता और जमीनी कार्यशैली का सम्मान किया है। भाजपा हमेशा से कार्यकर्ताओं की पार्टी रही है और संगठन समय-समय पर समर्पित एवं सक्रिय नेताओं की क्षमताओं का उपयोग कर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपता रहा है।

नई कार्यसमिति में मंत्री तुलसीराम सिलावट, विश्वास सारंग, गोविंद सिंह राजपूत, चेतन्य काश्यप, संपतिया उइके, सावित्री ठाकुर, कृष्णा गौर, संध्या राय, ललिता यादव और ममता गुप्ता सहित विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।

भाजपा संगठन ने नई कार्यसमिति में महिला नेताओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों को पर्याप्त स्थान देकर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है।

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