*बकरीद की कुर्बानी से आहत मुस्लिम युवक ने अपनाया सनातन धर्म, बिलाल बना ‘विशाल*…. *महादेवगढ़ मंदिर खंडवा में विधि-विधान से हुई घर वापसी, जयकारों से गूंजा परिसर*


बकरीद की कुर्बानी से आहत मुस्लिम युवक ने अपनाया सनातन धर्म, बिलाल बना ‘विशाल’
महादेवगढ़ मंदिर में विधि-विधान से हुई घर वापसी, जयकारों से गूंजा परिसर
रिपोर्ट:यश पांडे


खंडवा/खिरकिया। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में धर्म और आस्था से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। खिरकिया क्षेत्र के रहने वाले एक मुस्लिम युवक ने अपनी इच्छा से सनातन धर्म स्वीकार कर लिया। युवक का नाम बिलाल बताया गया है, जिसने अब अपना नाम बदलकर ‘विशाल’ रख लिया है। यह पूरा धार्मिक अनुष्ठान खंडवा के प्रसिद्ध महादेवगढ़ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच संपन्न हुआ।
बताया जा रहा है कि बिलाल काफी समय से मानसिक रूप से धर्म परिवर्तन को लेकर विचार कर रहा था। उसने महादेवगढ़ मंदिर पहुंचकर मंदिर के प्रमुख अशोक पालीवाल के समक्ष अपनी इच्छा जाहिर की और कहा कि वह अपनी स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाना चाहता है। युवक ने बताया कि बचपन से ही बकरीद के मौके पर होने वाली पशु कुर्बानी उसे भीतर तक विचलित करती रही है। बेजुबान जानवरों के कत्ल को देखकर उसके मन में लंबे समय से पीड़ा और बेचैनी थी, जो समय के साथ और गहरी होती चली गई।
युवक ने बताया कि हाल ही में बकरीद के दौरान पशुओं की कुर्बानी देखने के बाद उसका मन पूरी तरह व्यथित हो गया। इसी बीच उसने पुरुषोत्तम मास की महत्ता के बारे में सुना। धार्मिक मान्यताओं और अपनी आस्था से प्रेरित होकर उसने सनातन धर्म को अपनाने का निर्णय लिया और महादेवगढ़ पहुंच गया।
महादेवगढ़ मंदिर में युवक की घर वापसी के लिए विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। अनुष्ठान के तहत उसका सिर मुंडन कराया गया और शुद्धिकरण के लिए ‘10 विधि स्नान’ संपन्न कराया गया। इस दौरान गंगाजल, गो-दुग्ध, पंचामृत, गोमूत्र, गौ-गोबर, तुलसी रज सहित विभिन्न धार्मिक सामग्री से स्नान कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच उपनयन संस्कार पूर्ण हुआ।
अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सनातन धर्म से जुड़े लोग मौजूद रहे। संस्कार पूर्ण होने के बाद भगवान महादेव की महाआरती की गई। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के अंत में मंदिर प्रबंधन की ओर से विशाल को पवित्र ग्रंथ रामायण भेंट की गई। विशाल ने कहा कि उसने अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत की है और आगे सनातन जीवन पद्धति के अनुसार चलने का संकल्प लिया है। इस पूरे घटनाक्रम की क्षेत्र में व्यापक चर्चा बनी हुई है।




