*बुद्धि ही तत्व की समीक्षा करती है-: साध्वी प्रज्ञा श्री जी* *आत्म निंदा करने से जीव को पश्चाताप होता है -:साध्वी प्रणति श्री जी*

बुद्धि ही तत्व की समीक्षा करती है-: साध्वी प्रज्ञा श्री जी
आत्म निंदा करने से जीव को पश्चाताप होता है -:साध्वी प्रणति श्री जी

खिरकिया-:दिनांक 10.99.2025
दिन बुधवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की आज्ञा नुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी महाराज साहब ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि गाड़ी वही सही है जिसका ब्रेक सही है और मानव वही सही है जिसका ब्रेन सही है। भले ही महंगी से महंगी गाड़ी हो पर यदि उसका ब्रेक ठीक से काम नहीं कर रहा है तो आप उसमें बैठना पसंद नहीं करेंगे इस प्रकार कोई मानव दिखने में भले ही कितना ही सुंदर हो पर यदि उसका ब्रेन ठीक से काम नहीं कर रहा है तो कोई भी उससे बात करना पसंद नहीं करता है। व्यक्ति की बुद्धि ही तत्व की समीक्षा करती है कि क्या उसके लिए लाभ का है और क्या नुकसान का है। व्यक्ति को हर समय अपना विवेक जागृत रखना पड़ता है। प्रज्ञा हीन व्यक्ति तो गुड गोबर एक कर देता है। व्यक्ति की बुद्धि तत्व का निरीक्षण द्रव्य क्षेत्र काल भाव के अनुसार करती है।
श्री प्रणति श्रीजी महाराज साहब ने फरमाया कि- जब व्यक्ति के हृदय में सरलता होती है तो ही उसकी मन आलोचना करने का होता है। आलोचना का भाव मन में आते ही व्यक्ति पाप से घृणा करने लगता है। जिस प्रकार पैर में लगा शल्य व्यक्ति को इस भव में दर्द देता है लेकिन माया ,निदान और मिथ्या दर्शन शल्य यह तीन शल्य व्यक्ति की आत्मा को भव-भव में दर्द देते हैं। आत्म निंदा करने से जीव को लाभ की प्राप्ति होती है परनिंदा करने से नहीं। हम अपने घर में कचरा सहन नहीं कर पाते हैं पर हमने अपने दिमाग में दूसरों के बारे में सोच सोच कर कितना कचरा भर रखा है। भगवान ने फरमाया है कि पर निंदा का कचरा आत्म निंदा से दूर करना है । आत्म निंदा करने से जीव को पश्चाताप होता है और भीतर में ग्लानी उत्पन्न होती है कि मैं क्या-क्या पाप किए हैं और उसके फल स्वरुप मेरी आत्मा को क्या-क्या भुगतान करना पड़ेगा। पश्चाताप की भट्टी में जलकर आत्मा उर्ध्व गामी बनती है अपूर्व करण गुणस्थान प्राप्त कर आगे बढ़कर मोह कर्म को क्षय कर लेती है और अव्याबाध सुख को प्राप्त करती है। हमेशा पर दोष नहीं स्व दोष देखने की दृष्टि रखना चाहिए।
महासतीया जी के दर्शनार्थ शासन दीपिका प्रज्ञा श्री जी एवं प्रेक्षा श्री जी म.सा. के सांसारिक वीर भ्राता,वरिष्ठ स्वाध्यायी मुंबई से रोशनलाल कोठारी सूरत से वीर भ्राता संजय कोठारी,भतीजा तन्मय कोठारी एवं मुंबई से सांसारिक बहन लीला चिप्पड़ एवं प्रिया चिप्पड़ उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्रावक- श्राविकाएं और श्रृद्धाशील गुरु भक्त उपस्थित थे ।धर्म सभा का संचालन आशीष समदडिया ने किया।
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