*सभी दानों में अभयदान सर्वश्रेष्ठ है — वरिष्ठ स्वाध्यायी ललित कटारिया*…. *जीवन में सरलता, सहजता होनी चाहिए — स्वाध्यायी ऋषभ मुणत*… *आत्मा से महात्मा और महात्मा से परमात्मा बने– स्वाध्यायी धीरज चौरडिया*

सभी दानों में अभयदान सर्वश्रेष्ठ है — वरिष्ठ स्वाध्यायी ललित कटारिया
जीवन में सरलता, सहजता होनी चाहिए — स्वाध्यायी ऋषभ मुणत
आत्मा से महात्मा और महात्मा से परमात्मा बने– स्वाध्यायी धीरज चौरडिया
रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के अंतर्गत समता प्रचार संघ के माध्यम से पधारे वरिष्ठ स्वाध्यायी ललित कटारिया रतलाम ने पर्यूषण पर्व के तृतीय दिवस पर समता भवन में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि – प्रत्येक संसारी जीव सुख चाहता है, दुख कोई भी नहीं चाहता।संसार का सुख क्षणिक है लेकिन मोक्ष का सुख अनंत है।मोक्ष का सुख प्राप्त करने के लिए जीवन में आचरण करने योग्य दो बातें बताई गई हैं पहली – निष्काम सेवा दूसरी – जीवन में निरंतरता ।मोक्ष की ओर अग्रसर होने के लिए भगवान ने श्रावक के लिए चार चीज बताई हैं दान,शील, तप और भावना।उन्होंने आगे कहा कि-सभी दानों में अभय दान सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि सभी जीव जीना चाहते हैं, मरना कोई नहीं चाहता।दान में वस्तु का नहीं, भावों का महत्व होता है।शुद्ध भाव से दिए गए दान से तीर्थंकर गोत्र का बंध भी किया जा सकता है ।
इसके पूर्व स्वाध्यायी ऋषभ मुणत रतलाम ने एवंता मुनि के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि –जीवन में सरलता, सहजता और समभाव होना चाहिए। जिनके जीवन में सरलता , सहजता और समभाव होता है वे शीघ्र ही मोक्ष के निकट पहुंच सकते हैं।उन्होंने आगे कहा कि – प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में विनय होना बहुत जरूरी है। विनय ही धर्म का मूल है ।
मुंबई से पधारे स्वाध्यायी धीरज चौरडिया ने कहा कि -पर्यूषण पर्व के 8 दिन आत्मा को जगाने और कर्मों को परास्त करने की प्रेरणा देते है।हम इस शुभ अवसर का लाभ उठाएं और आत्मा से महात्मा, महात्मा से परमात्मा बनने का प्रयास करें। इस अवसर पर सैकड़ों श्रावक – श्राविकाएं एवं श्रद्धा शील उपासक धर्म सभा में उपस्थित रहे। स्वाध्यायी बंधुओं के मुखारविंद से संगीता विनायक्या, उज्जवला बाफना,सुनंदा कोचर,रत्ना समदड़िया,सिद्धार्थ विनायक्या ने 3 उपवास कर दृढ़ मनोवल का परिचय दिया।कई श्रद्धशील उपासकों ने त्याग
प्रत्यख्यान ग्रहण किए। एक वर्ष के बालक चर्चित के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पारस चोरड़िया परिवार द्वारा प्रभावना का लाभ लिया गया।प्रतिदिन होने वाली धार्मिक प्रतियोगिता पर्यूषण के रंग ज्ञान ध्यान के संग के पारितोषिक वितरण का लाभ बिमला बाई मांगीलाल भंडारी परिवार ने लिया।धर्म सभा का संचालन आशीष समदड़िया ने किया।




