*स्मार्ट मीटर बना ‘कमाई का मीटर’! एक ही मीटर पर बार-बार वसूले जा रहे ₹5379* ….. *स्मार्ट मीटर बना ‘कमाई का मीटर’! एक ही मीटर पर बार-बार वसूले जा रहे ₹5379*

स्मार्ट मीटर का ‘डबल चार्ज’ खेल! एक ही मीटर से बार-बार वसूले जा रहे ₹5379, सरकारी कर्मचारियों की जेब पर डाका?
तबादले के साथ हर बार नए सिरे से वसूली का आरोप, पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपये के खेल की आशंका

भोपाल। मध्य प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरकारी आवासों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों के नाम पर बिजली कंपनी द्वारा एक ही मीटर से बार-बार ₹5379 की वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस व्यवस्था से सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, किसी कर्मचारी का तबादला होने पर उसके सरकारी आवास से स्मार्ट मीटर निकाल लिया जाता है। इसके बाद जब वही कर्मचारी नए सरकारी आवास में प्रवेश करता है, तो उससे फिर ₹5379 जमा कराए जाते हैं। वहीं, पुराने आवास में आने वाले नए कर्मचारी से भी उसी स्थान पर स्मार्ट मीटर के नाम पर दोबारा ₹5379 वसूले जाते हैं।
इस तरह एक ही मीटर और एक ही कनेक्शन के नाम पर बिजली कंपनी द्वारा बार-बार राशि वसूले जाने का आरोप लगाया जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब स्मार्ट मीटर कंपनी की संपत्ति है और उसे वापस लेकर दूसरे स्थान पर लगाया जा रहा है, तो उसकी कीमत प्रत्येक नए उपभोक्ता से दोबारा क्यों वसूली जा रही है?
जानकारों का कहना है कि पहले पारंपरिक (एनालॉग) मीटर के समय नामांतरण की प्रक्रिया मात्र ₹200 में पूरी हो जाती थी, लेकिन स्मार्ट मीटर व्यवस्था में कर्मचारियों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, केवल भोपाल में ही पिछले दो वर्षों के दौरान हजारों सरकारी आवासों में इस प्रक्रिया के तहत स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। यदि पूरे प्रदेश के आंकड़ों का आकलन किया जाए तो यह राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।
फिलहाल बिजली कंपनी के अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मामले को लेकर पारदर्शी जांच और स्पष्ट जवाब की मांग तेज होती जा रही है।




