*क्षमा वीरस्स भूषणम — वरिष्ठ स्वाध्यायी ललित कटारिया*…. *शांति साधना का पर्व है —स्वाध्यायी ऋषभ मूणत*…. *राग देश कर्म बीज है स्वाध्यायी —धीरज चौरडिया*

क्षमा वीरस्स भूषणम — वरिष्ठ स्वाध्यायी ललित कटारिया
शांति साधना का पर्व है —स्वाध्यायी ऋषभ मूणत
राग देश कर्म बीज है स्वाध्यायी —धीरज चौरडिया
रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया — वरिष्ठ स्वाध्यायी ललित कटारिया ने कहा कि सुखी जीवन जीना है तो शिकायत और प्रक्रिया से दूर रहें। त्याग और सहना सीखें। दूसरों के दोषों को ना देखें जीवन में शांति और संभव रखें। आज का यह पर्व व्यक्ति विशेष, जाति, वर्ग के लिए नहीं है यह मानव मात्र के लिए है। इस पर्व पर सभी से अंतःकरण से क्षमायाचना करें एवं क्षना प्रदान करें। क्षमा मांगना और क्षमा करना वीरों का काम है। “क्षमा वीरस्स भूषणम” उन्होंने भगवान महावीर स्वामी के जीवन चारित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन परिवर्तन से दृष्टि बदलती है और दृष्टि बदलने से सृष्टि बदलती है जीवन का परिवर्तन सद सानिध्य से ही संभव है जीवन में जब कष्टों का पहाड़ खड़ा हो जाए उसे समय यह समझना कि “मैं महावीर हूं” और जो कष्ट दे रहा है वह “सिद्धा जैसा जीव है”।
इसके पूर्व रतलाम से पधारे स्वाध्यायी ऋषभ मूणत ने कहा कि यह पर आत्मा के उत्थान का पर्व है क्षमा आलोचना का पर्व है इस पर्व पर धर्म आराधना,साधना करके आत्मा को परमात्मा बनाने की और अग्रसर हो। उन्होंने आगे कहा की वाणी और शरीर की अपेक्षा व्यक्ति भावों से अधिक पाप करता है। आज का पर्व पापों की आलोचना एवं क्षमा याचना करने का पर्व है यदि हम अंतर मन से आलोचना एवं क्षमा याचना करेंगे तो वास्तविक शांति का अनुभव होगा।
मुंबई से पधारे स्वाध्यायी धीरज चौरडिया ने कहा कि राग – द्वेष दो कर्म बीज है। राग- द्वेष की गांठों को खोलने का सबसे उत्तम तरीका “क्षमा याचना” है। क्रोध को क्षमा से, मान को विनय से जीता जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा यह पर्व “त्याग” का पर्व है। तप आराधना करके भाव पर किया जा सकता है हमारा परम लक्ष्य मोक्ष है। सम्यक ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की आराधना करके मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है।
स्वाध्यायी बंधुओं ने आत्म पर लगे कर्म मेल को धोने हेतु आलोयणा एवं पाटावली का वाचन किया दोपहर जंबू चारित्र का वाचन एवं प्रतियोगिता संपन्न हुई।
इस अवसर पर सैकड़ों श्रावक – श्राविकाओ सहित श्रद्धाशील गुरु भक्त उपस्थित थे।
श्री मधुर मुनिजी जी महाराज साहब की सांसारिक भाभी एवं वीर पिता कमलचंद समदड़िया वीर माता सुषमा देवी की पुत्र बधु एवं वीर भ्राता आशीष समदड़िया की धर्म साहिका रत्ना समदड़िया ने गुरु राम की कृपा से स्वाध्यायियो के मुखार बिंद से मंगलवार को 8 उपवास के पचखान ग्रहण आपके द्वारा पूर्व में में की गई तपस्या… 32,16,15-दो वार,11, 9-दो वार, 8-चार वार,7, 5 एवं 40 लगभग तेले के साथ सैकड़ों रात्रि संवर कर अपनी आत्मा को हलूकर्मी बना रही है।
जैन धर्म में उपवास निराहार कर गर्म जल लेकर किया जाता है वो भी रात्रि में नहीं।
तीन उपवास के पचखान प्रमिला भंडारी,भारती विनायक,नरेंद्र विनायक प्रियंका पुनीत सांड,छोटी बालिका वर्तिका पंकज भंडारी ने कर दृढ़ मनोवल का परिचय दिया।उत्साह पूर्वक सभी ने दिवस की महत्ता समझकर तप त्याग धर्म ध्यान के साथ जिनवाणी का लाभ लिया।
कई श्रावक श्राविकाओं के साथ साथ पौषध – रात्रि संवर की आराधना गुरुभक्त बद्रीप्रसाद पटेल,मोहन सोनी ,विजेंद्र राजपूत ने कर आदर्श उपस्थित किया।




