*परचरी पुराण के चतुर्थ दिवस पर दीदी चेतना भारती का ओजस्वी प्रवचन संत सिंगाजी महाराज नर को नारायण बनने की कला सिखाने वाले सद्गुरु*

परचरी पुराण के चतुर्थ दिवस पर दीदी चेतना भारती का ओजस्वी प्रवचन संत सिंगाजी महाराज नर को नारायण बनने की कला सिखाने वाले सद्गुरु
रिपोर्ट: राजेश मेहता
ग्राम चारखेड़ा में चल रही परचरी पुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर व्यासपीठ से दीदी श्री चेतना भारती ने गूढ़ आध्यात्मिक विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि संतों की वाणी किसी शास्त्रीय कल्पना की नहीं, बल्कि उनके निज अनुभव का उद्बोधन होती है। जगत में कर्ता-भाव रखकर अचेतन अवस्था में किया गया प्रत्येक कर्म मनुष्य को अशांति देता है, जबकि स्वयं को पहचानकर आंतरिक शांति को प्राप्त कर चुके बुद्ध पुरुष कर्म में लिप्त दिखाई देते हुए भी भीतर से अकर्ता हो जाते हैं।
दीदी चेतना भारती ने निमाड़ की पावन भूमि को संत सिंगाजी महाराज के आत्मज्ञान की साक्षी बताया। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज ने सम्पूर्ण निमाड़ को पुण्य और धन्य भूमियों में प्रतिष्ठित किया है। संत सिंगाजी महाराज की वाणी आज भी मानव को सत्य की ओर ले जाती है—जिसे गाकर, सुनकर और जीवन में उतारकर गहन अशांति, शोक और क्षुब्धता से निकलकर परम आनंद और सत्य की अनुभूति की जा सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निमाड़वासी सिंगाजी महाराज को भले ही पशुओं का देवता मानते हों, परंतु वास्तव में वे नर को नारायण होने की कला देने वाले सद्गुरु हैं। यह संदेश परचरी पुराण के माध्यम से व्यासपीठ से जन-जन तक पहुंचाया गया। दीदी ने कहा कि जहां-जहां संत सिंगाजी महाराज ने निवास किया या ठहरे, वे सभी स्थल आज भी अपूर्व आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हैं।
प्रवचन में झाबुआ स्थित देवझिरी धाम का विशेष उल्लेख करते हुए बताया गया कि संत सिंगाजी महाराज की साधना से यह क्षेत्र सिद्ध और ऊर्जावान बना, जहां स्नान और दर्शन से तन-मन के रोग नष्ट होते हैं। इस अवसर पर सिंगाजी महाराज की समाधि की दिव्य कथा का भावपूर्ण श्रवण कराया गया। आरती, वधावा और जयकारों के साथ हलवा प्रसाद की कढ़ाई भी की गई।

कथा का आयोजन ग्राम के धर्मप्रेमी पटेल परिवार द्वारा लोक कल्याण की भावना से किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागी बन रहे हैं।




