*विजन, मिशन और गोल इन तीनों पर हमारा फोकस होना चाहिए – साध्वी श्री प्रेक्षा श्रीजी*

विजन, मिशन और गोल इन तीनों पर हमारा फोकस होना चाहिए – साध्वी श्री प्रेक्षा श्रीजी
अच्छा इंसान बनना हमारा लक्ष्य हो- साध्वी श्री प्रणति श्रीजी

खिरकिया/छीपाबड़, छीपाबड़ ग्राम की बेटी प्रणति श्री जी महाराज साहब ने शांति निकेतन स्कूल छीपाबड़ में फरमाया कि- बच्चों का स्कूल में आने का उद्देश्य अलग-अलग हो सकता है पर ज्ञान प्राप्त करना हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। ज्ञान प्राप्त करने से भी ज्यादा एक अच्छा इंसान बनना हमारा लक्ष्य हो। अच्छा इंसान वही व्यक्ति बन सकता है जो दूसरे का दर्द समझे। जानवर बोल नहीं सकते पर दर्द उनको भी महसूस होता है। किसी प्राणी को दर्द में देखकर हमारे भीतर में भी उनके लिए दया आए वही अच्छे इंसान की पहचान है। अपने परिवारजन सगे संबंधियों के लिए तो हम दर्द दिखाते हैं पर सिर्फ अपने नहीं परायों के प्रति भी हमारे भीतर में इंसानियत होना चाहिए। पढ़ाई करके हमें सिर्फ मेरिट में नहीं आना है बल्कि अच्छा इंसान बनकर अपने देशवासियों की सेवा भी करना है। यदि भीतर में मानवता होगी तो डॉक्टर बनकर हम गरीबों की मुफ्त सेवा भी कर सकते हैं। संसार की समस्त आत्मा दुख दर्द महसूस करती है पर उसे दूर करने का प्रयास एक अच्छा इंसान कर सकता है।
श्री प्रेक्षा श्री जी महाराज साहब ने फ़रमाया की – आज इस स्कूल के बच्चों का सौभाग्य है कि वह यहां बैठकर अपने भाग्य को गुड ,बेटर और बेस्ट बना रहे हैं। आप सभी के भीतर में राम,कृष्ण ,महावीर छिपे हैं पर इस शक्ति को जागृत करना इस स्कूल की जिम्मेदारी है। ताकत सभी के भीतर है पर उसे इन्वेस्ट करना है या वेस्ट करना है यह हम पर डिपेंड करता है। ताकत मिलती है माता-पिता वह गुरु के चरण स्पर्श करने से। पढ़ाई का मूल मंत्र है प्रणाम करना। प्रणाम करने से परिणाम अच्छा आएगा। प्रातः उठकर भीतर में ऐसी संकल्प शक्ति लाइए जो आपका जीवन बदल सके। इसके लिए विजन ,मिशन और गोल इन तीनों पर हमारा फोकस होना चाहिए। विजन अर्थात हमारा दृष्टिकोण। भारतीय संस्कृति धर्म प्राण संस्कृति है। आज आधार कार्ड तो सबके पास है पर आदर कार्ड कितनों के पास है। अच्छा इंसान बनकर या भगवान बन सकते हैं।गुरु व समुद्र दोनों ही गहरे हैं। समुद्र की गहराई में जाने पर इंसान डूब जाता है और गुरु की गहराई पार लगा देती है। एकलव्य की गुरु समर्पणा आज भी याद की जाती है। ऐसा समर्पण सभी को गुरु के प्रति रखना चाहिए। मिशन को पूरा करने के लिए अपना नेचर बदले, नेचर बदला तो टेंप्रेचर बदल जाएगा, टेंप्रेचर बदला तो आपका सिग्नेचर बदल जाएगा और सिग्नेचर आपका पूरा फ्यूचर ही बदल देगा। बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं इस गीली मिट्टी से आपको कलश बनाना है जो भगवान के मस्तक पर चढ़ता है। यदि मिशन पूरा करना है तो टेंशन कभी मत लेना। अपने लक्ष्य पर फोकस कीजिए। और उसे पूरा करने को अपना सर्वस्व लगा दीजिए। महासतियों द्वारा यह व्याख्यान शांति निकेतन स्कूल छिपाबड़ में दिया गया । ज्ञातव्य है कि साध्वी प्रणति श्रीजी ग्राम छिपाबड के स्व. दगडूलाल चौरडिया की सांसारिक बेटी है जिन्होंने 18 वर्ष पूर्व खिरकिया नगर में गुरु राम द्वारा दीक्षा ग्रहण की थी। इस अवसर पर शांति निकेतन स्कूल के विद्यार्थियों सहित खिरकिया छीपाबड़ ग्राम के गणमान्य नागरिक ,समाज के श्रावक – श्राविकाएं एवं श्रद्धा शील उपासक उपस्थित थे।
भाई जय सिंह राजपूत की विनती के पर म.सा. स्कूल पहुंचे और बच्चों को मार्गदर्शन प्रदान किया। कई बच्चों ने संकल्प लिया कि प्रतिदिन माता,पिता गुरुजनों को प्रणाम करेंगे,मोबाइल या टीवी देखते भोजन नहीं करेंगे,किसी जीव को नहीं मारेंगे ना ही सताएंगे,
सभी का आभार जय सिंह राजपूत ने माना।
प्रभावना वितरण का लाभ निर्मल हुकुमचंद विनायक (जैन) परिवार ने लिया।
धर्मसभा में संचालन आशीष समदड़िया ने किया।




