*भाई दूज पर स्नेह का तिलक, प्रेम का वचन :भाई-बहन के अटूट रिश्ते का उत्सव*….. *भाई दूज को भाई टीका भी कहा जाता है* ….*जाने भाई दूज की पौराणिक कथा*.. .*(देखे वीडियो)*

भाई दूज (जिसे भाई टीका भी कहा जाता है) दीपावली के बाद आने वाला अत्यंत पवित्र और भावनात्मक पर्व है, जो भाई–बहन के प्रेम, स्नेह और सुरक्षा के रिश्ते को समर्पित होता है।
आइए विस्तार से समझते हैं
रिपोर्ट:यश पांडे

भाई दूज का कारण और महत्व
भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।
इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर, आरती उतारकर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
भाई बदले में अपनी बहन को उपहार देते हैं और जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देते हैं।
यह पर्व भाई-बहन के बीच के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है, ठीक वैसे ही जैसे रक्षाबंधन में धागे से प्रेम का बंधन बांधा जाता है।
भाई दूज की पौराणिक कथा
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कथा 1 :यमराज और यमुनाजी की कथा
भाई दूज से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा यमराज और उनकी बहन यमुना की है।
कहानी के अनुसार : यमराज और यमुनाजी भाई-बहन थे।
एक दिन यमुनाजी ने अपने भाई यमराज को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया।
यमराज, जो मृत्यु के देवता हैं, बहुत व्यस्त रहते थे, लेकिन अपनी बहन का आग्रह टाल नहीं सके और उनके घर पहुँचे।
यमुनाजी ने स्नान करवाया, तिलक लगाया आरती उतारी और स्वादिष्ट भोजन कराया।
इस स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने अपनी बहन को वरदान दिया कि जो भी इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे यम का भय नहीं रहेगा।
तब से इस दिन को “यम द्वितीया” या भाई दूज के रूप में मनाया जाने लगा।
कथा 2 :भगवान कृष्ण और सुभद्रा की कथा
एक अन्य कथा के अनुसार,
नरकासुर नामक राक्षस का वध करने के बाद भगवान कृष्ण जब द्वारका लौटे, तो उनकी बहन सुभद्रा ने उनका स्वागत किया।
सुभद्रा ने उनके माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी और मिठाई खिलाई।
कृष्ण ने प्रसन्न होकर कहा कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाएगा उसका जीवन सुखमय होगा।
तब से यह परंपरा चली आ रही है।
भाई दूज का आध्यात्मिक अर्थ
यह पर्व स्नेह, आशीर्वाद और सुरक्षा का प्रतीक है।
यह याद दिलाता है कि रिश्तों का मूल्य धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि प्यार और सम्मान से होता है।
बहन अपने भाई की लंबी उम्र और सुख के लिए प्रार्थना करती है, और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है।
भाई दूज की परंपराएँ
1. बहन अपने भाई को घर बुलाती है।
2. भाई का तिलक, आरती, और मिठाई से स्वागत करती है।
3. भाई बहन को उपहार या आशीर्वाद के रूप में कुछ भेंट देता है।
4. इस दिन यम-यमुना स्नान का विशेष महत्व भी बताया गया है।
इस प्रकार भाईदूज में हिन्दू रीतिरिवाज़ों के अनुसार के महत्वपूर्ण त्यौहार है जो भाई बहन के पवित्र रिश्ते ओर स्नेह पारिवारिक एकता का प्रतीक है




