क्राइममध्य प्रदेश

*नगर परिषद नगर पालिकाओं में कैसे होता है भ्रष्टाचार रिपोर्ट*… *जनप्रतिनिधि कैसे अपने नैतिक दायित्वों को तांक में रख कर भ्रष्टाचार करते है*.. ..*समाज में आज भी भ्रष्टाचार से नाम जुड़ने पर छवि पर असर होता है और उस जनप्रतिनिधि से जुड़े राजनैतिक दल को भी नुकसान उठाना पड़ता है*… .. ….*हम इस लेख में समझ सकते है नगर परिषदों पालिकाओं में कैसे भ्रष्टाचार हो सकता है*

रिपोर्ट:यश पांडे

आए दिन नगर पालिका नगर परिषद के अध्यक्ष और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते है ये आज के जमाने में आम बात है

पर उतनी आम बात नहीं जितने हम शब्दों में समझते है कोई भी जन प्रतिनिधि का अपना एक नैतिक दायित्व है आज भी हमारे समाज में भ्रष्टाचार को गलत नजरों से देखा जाता है अगर किसी पर आरोप भी है तो उसे अपनी छवि सुधारने के लिए जनता में अपनी बात रखना पड़ती है

जनप्रतिनिधि कैसे अपने नैतिक दायित्वों को तांक में रख कर भ्रष्टाचार करते है और अपने राजनैतिक दल की छवि खराब करते है जिसे उस राजनैतिक दल को नुकसान उठाना पड़ता है

आपको हम समझाते है निम्न प्रकार से नगर परिषदों पालिकाओं में भ्रष्टाचार हो ये है

नगर पालिका परिषदों में भ्रष्टाचार विभिन्न तरीकों से हो सकता है। ये भ्रष्टाचार आम तौर पर वित्तीय, प्रशासनिक और कार्यान्वयन स्तर पर होता है। नीचे कुछ सामान्य तरीकों का उल्लेख किया गया है जिनसे नगर पालिकाओं में भ्रष्टाचार किया जाता है:

1. ठेके और परियोजनाओं में भ्रष्टाचार

ठेकेदारों को काम देने में घूस ली जाती है।

टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होती — पहले से तय लोगों को टेंडर दिया जाता है।

कम गुणवत्ता वाली सामग्री का प्रयोग करके निर्माण कार्य किया जाता है, जिससे लागत बचाई जाती है और पैसे अधिकारियों में बाँटे जाते हैं।

2. फर्जी बिलिंग और भुगतान

ऐसे कामों के लिए भुगतान दिखाया जाता है जो कभी हुए ही नहीं।

एक ही काम के लिए बार-बार भुगतान किया जाता है।

काम पूरा नहीं होने के बावजूद फुल पेमेंट किया जाता है।

3. प्रॉपर्टी टैक्स और लाइसेंसिंग में भ्रष्टाचार

व्यापारिक प्रतिष्ठानों से बिना रसीद घूस लेकर लाइसेंस जारी करना।

टैक्स कम करने या रिकॉर्ड में हेरफेर के बदले रिश्वत लेना।

अवैध निर्माणों को नजरअंदाज करना या उनसे “हफ्ता” लेना।

4. भर्ती और पोस्टिंग में भ्रष्टाचार

नगर पालिका में कर्मचारियों की भर्ती में पैसे लेकर नौकरी देना।

मनचाही पोस्टिंग के लिए अधिकारियों से रिश्वत लेना।

5. सरकारी योजनाओं और फंड में हेरफेर

गरीबों के लिए आने वाली योजनाओं का लाभ अपात्र लोगों को देना।

फंड का दुरुपयोग करना या उसे अपने निजी हित में लगाना।

योजना के नाम पर खर्च दिखाकर पैसे निकालना, जबकि असल में कोई काम नहीं होता।

6. दस्तावेज़ों में हेरफेर और मंजूरी प्रक्रिया

नक्शा पास करवाने, पानी/नाली कनेक्शन, भवन अनुज्ञा आदि में पैसे लेकर काम करना।

नियमों को ताक पर रखकर व्यक्तिगत फायदा पहुँचाना।

 

भ्रष्टाचार के कारण:

जवाबदेही और निगरानी की कमी

पारदर्शिता न होना

राजनीतिक संरक्षण

आम जनता की जागरूकता की कमी

कानूनी कार्रवाई में ढिलाई

 

समाधान के उपाय:

ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना (ऑनलाइन टेंडरिंग, भुगतान, मंजूरी)

लोकायुक्त या सतर्कता आयोग की सक्रिय भूमिका

सोशल ऑडिट और जनभागीदारी

आरटीआई (सूचना का अधिकार) का इस्तेमाल

मीडिया और जनसंख्या की निगरानी

 

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