*नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है*…. *माँ के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा करने से आयु बढ़ती है:पंडित श्री धीरेन्द्र शास्त्री जी (बागेश्वर धाम सरकार)* . ..*देखे वीडियो* …… *बागेश्वर धाम सरकार श्री पंडित धीरेन्द्र शास्त्री जीने ने बताया माँ की उपासना का महत्व (देखे वीडियो)* …


रिपोर्ट:यश पांडे
नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है।
इन्हें आदि स्वरूप और सृष्टि की जननी माना जाता है।
बागेश्वर धाम सरकार पंडित श्री धीरेन्द्र शास्त्री जी ने बताया माँ के इस स्वरूप की पूजा करने से आयु बढ़ती है
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महत्व:
माना जाता है कि माता कूष्मांडा ने अपने हास्य (हल्की मुस्कान) से ब्रह्मांड की रचना की थी।
इनकी उपासना से भक्त को आयु, यश, बल और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
रोग और दुःख दूर होकर जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
स्वरूप:
माँ कूष्मांडा आठ भुजाओं वाली देवी हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं।
इनके हाथों में कमल, धनुष-बाण, अमृतकलश, चक्र, गदा, जपमाला और कमंडलु रहते हैं।
इनका वाहन सिंह है।
पूजा विधि:
प्रातः स्नान करके पूजा स्थान पर कलश स्थापना करें।
माँ कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र पर गंगाजल छिड़कें और लाल वस्त्र अर्पित करें।
धूप-दीप, पुष्प, अक्षत और फल चढ़ाएँ।
नारियल, मालपुआ और सफेद कद्दू का भोग विशेष प्रिय माना जाता है।
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः” मंत्र का जाप करें।




