धर्म
*तृष्णा दुख का कारण है :- साध्वी प्रज्ञा श्री जी* *संयम धारण करने से शाश्वत सुखों को प्राप्त किया जा सकता है :- साध्वी प्रणति श्री जी*

तृष्णा दुख का कारण है :- साध्वी प्रज्ञा श्री जी
संयम धारण करने से शाश्वत सुखों को प्राप्त किया जा सकता है :- साध्वी प्रणति श्री जी
रिपोर्ट:यश पांडे

7 उपवास की तपस्विनी स्मिता महेंद्र रांका
खिरकिया – दिनांक 31/07/2025 दिन गुरुवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की अज्ञानुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि-संसार में जहां सुख की अनुभूति दिखाई दे रही है वह पुण्य के प्रभाव से है ।हमारी तृष्णा विशाल है। तृष्णा के कारण ही व्यक्ति दुखी है । हमारी आत्मा के साथ आठों कर्म लगे हुए हैं ।यदि कर्मों को खपाना है तो हमें तप करना पड़ेगा। आत्म शुद्धि के लिए किया गया विशेष अनुष्ठान तप कहलाता है। तप 12 प्रकार के हैं -अनशन बाह्य तप है जबकि स्वाध्याय अभ्यांतर तप है। आत्मा को परमात्मा बनाने के लिए हमें धर्म आराधना, साधना में पुरूषार्थ करना होगा। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए पुण्यवानी और पुरुषार्थ दोनो की आवश्यकता होती है।
इसके पूर्व प्रणति श्री जी महाराज साहब ने कह कि- अव्याबाध सुख को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को धर्म श्रद्धा जागृत करनी पड़ेगी ।अभ्याबाध सुख अर्थात बाधा रहित सुख। व्यक्ति जब संसारी साता और सुख को छोड़ देता है तो उसकी धर्म श्रद्धा जागृत हो जाती है ।जब तक हमें वैराग उत्पन्न नहीं होगा तब तक संसार के प्रति उदासीनता के भाव उत्पन्न नहीं होंगे ।उन्होंने आगे कहा कि -हमें संयमी जीवन धारण करना चाहिए। संयम धारण करने के बाद शाश्वत सुखों को प्राप्त किया जा सकता है।
धर्म सभा में संचालन नगीन मेहता ने किया। महासतिया जी की सद प्रेरणा से नगीनचंद भंडारी छीपाबड़ ने 3 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण कर दृढ़ आत्म मनोवल का परिचय दिया। स्मिता महेंद्र रांका ने 7 की तपस्या पूर्ण कर दिनांक 31/07/25 को पारणा किया। एवं प्रभावना का लाभ पवन पनराज मुणोत एवं महेंद्र मिश्रीलाल रांका ने लिया।
इस अवसर पर श्रावक – श्राविकाए एवं श्रद्धाशील गुरु भक्त उपस्थित थे।





