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*गेहूं पंजीयन ठप होने पर किसान मनोज विश्नोई ने उठाई आवाज, हजारों किसान परेशान* ….. *खिरकिया में तीन दिन से गेहूं पंजीयन बंद, किसान मनोज विश्नोई ने उठाया मुद्दा*…. *किसानों को होगा लाखों का नुकसान: मनोज विश्नोई ने प्रशासन से की पंजीयन तिथि बढ़ाने की मांग*

 

खिरकिया तहसील में गेहूं पंजीयन ठप, हजारों किसान परेशान

खिरकिया।
खिरकिया तहसील में पिछले तीन दिनों से गेहूं उपार्जन पंजीयन की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी हुई है, जिससे क्षेत्र के हजारों किसान परेशान हो रहे हैं। किसानों को पंजीयन के लिए सोसायटी केंद्रों और ऑनलाइन पोर्टल पर बार-बार प्रयास करने के बावजूद निराश होकर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार शासन द्वारा गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन प्रक्रिया 5 फरवरी से शुरू की गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 7 मार्च निर्धारित की गई है। लेकिन इस बीच करीब 4–5 दिन तक किसानों के खसरों पर गिरदावरी दर्ज नहीं होने के कारण पंजीयन नहीं हो पाए। वहीं पिछले तीन दिनों से उपार्जन की वेबसाइट भी काम नहीं कर रही, जिसके कारण पंजीयन पूरी तरह बंद हो गए हैं।

किसानों का कहना है कि वे लगातार सोसायटी केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पंजीयन नहीं होने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में जब उच्च अधिकारियों से संपर्क किया गया तो संबंधित अधिकारी वासुदेव भदौरिया द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उनका कहना था कि समस्या की शिकायत ऊपर भेज दी गई है और वहां से जो भी निर्देश आएंगे उसी के अनुसार कार्य होगा।

किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि तकनीकी समस्या के कारण पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं तो क्या पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाएगी, लेकिन इस बारे में भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

किसानों का कहना है कि यदि समय पर पंजीयन शुरू नहीं हुए तो उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। वर्तमान में मंडियों में गेहूं समर्थन मूल्य से कम दाम पर बिक रहा है, जहां गेहूं की कीमत लगभग 1800 से 2100–2200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच मिल रही है। जबकि सरकार किसानों के हित में समर्थन मूल्य लागू करती है, लेकिन पंजीयन नहीं होने के कारण किसानों को मजबूरन कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ सकता है।

स्वतंत्र किसान विचारक मनोज गोदारा ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पंजीयन व्यवस्था शुरू की जाए और आवश्यकता होने पर पंजीयन की तिथि बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।

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