Uncategorized

*TET अनिवार्यता के विरोध में उतरे शिक्षकों , 13 मार्च को मुख्यमंत्री के नाम देंगे ज्ञापन*… *27 साल बाद TET की अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, 13 मार्च को होगा विरोध*….. *TET आदेश से प्रदेशभर में आक्रोश, शिक्षक संगठन*….. *सेवा शर्तों में बदलाव के विरोध में शिक्षक हुए एकजुट*….. ….. *शिक्षकों में बढ़ा असंतोष, TET आदेश वापस लेने की मांग तेज*

TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का आक्रोश, 13 मार्च को मुख्यमंत्री के नाम सौंपेंगे ज्ञापन

रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया।
शासकीय शिक्षक संगठन जिला हरदा द्वारा प्रांतीय आह्वान पर 13 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन के प्रांतीय महामंत्री अशोक कुमार देवराले ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) देने संबंधी जारी किए गए पत्र से पूरे प्रदेश के शिक्षकों में भय और असंतोष का माहौल बन गया है।

उन्होंने बताया कि संचालक लोक शिक्षण भोपाल द्वारा विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना यह आदेश जारी किया गया है कि 27 वर्ष तक सेवा देने के बाद भी यदि शिक्षक को आगे नौकरी जारी रखनी है तो TET परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। इस आदेश से मध्यप्रदेश के शिक्षक संवर्ग में भारी रोष व्याप्त है। इसी के विरोध में 13 मार्च को पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।

इस संबंध में शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के प्रांताध्यक्ष राकेश दुबे ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव विधि, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण विभाग तथा आयुक्त लोक शिक्षण भोपाल को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित कराया है।

संगठन के अनुसार मध्यप्रदेश के अधिकांश अध्यापक, माध्यमिक शिक्षक एवं प्राथमिक शिक्षक की प्रारंभिक नियुक्ति शिक्षाकर्मी और संविदा शिक्षक के रूप में हुई थी, जो सेवा की निरंतरता में शामिल है। यह नियुक्तियां शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1997, 1998, अध्यापक भर्ती अधिनियम 2008 तथा राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) नियम 2018 के तहत की गई थीं। इन नियमों में कहीं भी TET परीक्षा उत्तीर्ण करना सेवा की अनिवार्य शर्त के रूप में उल्लेखित नहीं है।

संगठन के जिलाध्यक्ष मजीद खान ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश (सिविल अपील 2634/2013) में स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति के बाद उसकी सेवा शर्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता। ऐसे में यह आदेश शिक्षकों के लिए चिंता और असमंजस का कारण बन गया है।

शासकीय शिक्षक संगठन ने शासन से मांग की है कि यह आदेश तत्काल वापस लिया जाए तथा मध्यप्रदेश सरकार शिक्षकों के हित में TET संबंधी निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करे, ताकि प्रदेश के शिक्षकों को राहत मिल सके।

संगठन ने जिले के सभी शिक्षक साथियों से अपील की है कि 13 मार्च 2026 को जिला मुख्यालय पहुंचकर अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों और ज्ञापन कार्यक्रम को सफल बनाएं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!