*सेवा समाप्ति के प्रावधान पर शिक्षकों की नाराजगी, मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार*…. *TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का आक्रोश, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन* … *शिक्षक पात्रता परीक्षा निरस्त करने की मांग तेज*…. ……. *वेतन, एरियर और TET मुद्दे पर शिक्षकों का प्रदर्शन, संयुक्त कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन*….


TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन,
रिपोर्ट:यश पांडे


खिरकिया/हरदा।
शासकीय शिक्षक संगठन जिला हरदा द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता निरस्त करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन संयुक्त कलेक्टर श्री सतीश राय को सौंपा गया। यह ज्ञापन संगठन के जिलाध्यक्ष मजीद खान के नेतृत्व में दिया गया।
ज्ञापन में बताया गया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा का आदेश जारी होते ही पूरे प्रदेश में इसका विरोध शुरू हो गया है। इसी क्रम में जिला इकाई हरदा के शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन के प्रांतीय महामंत्री अशोक कुमार देवराले ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की भर्ती उस समय के नियमों और मध्यप्रदेश शासन के राजपत्र के अनुसार विधिवत रूप से की गई थी। ऐसे में बाद में शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य करना और दो वर्ष में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने पर सेवा समाप्ति जैसा प्रावधान न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से कार्यरत शिक्षक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ विद्यार्थियों को शिक्षित कर रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। केवल पात्रता परीक्षा के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त करना उनके भविष्य और परिवारों के लिए गंभीर समस्या खड़ी कर सकता है।
ज्ञापन में स्थानीय समस्याओं को भी उठाया गया। इसमें टिमरनी एवं हरदा विकासखंड के प्राथमिक शिक्षकों का फरवरी 2026 का वेतन शीघ्र जारी करने, हरदा विकासखंड के 141 शिक्षकों के वेतन से की गई कटौती की राशि वापस करने, 12 एवं 24 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षकों को नियमानुसार क्रमोन्नत वेतनमान देने, ई-अटेंडेंस के कारण रुके वेतन का भुगतान, बाजनिया संकुल के डीए एरियर का भुगतान, नवीन शिक्षक संवर्ग के परीक्षा अवधि पूर्ण होने पर 100 प्रतिशत वेतन भुगतान तथा विकलांग शिक्षकों को विकलांग भत्ता देने की मांग की गई।
संगठन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि सरकार इस विषय में संवेदनशीलता दिखाते हुए सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पिटीशन दायर करे और शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने अथवा पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इससे मुक्त करने पर सकारात्मक निर्णय ले।
ज्ञापन सौंपते समय संगठन के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।




