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*एमपी में 65 हजार ट्राइबल शिक्षकों पर TET का संकट’! 2 साल में परीक्षा पास नहीं तो नौकरी खतरे में*…. …. *जनजातीय कार्य विभाग ने जारी किया आदेश*

 

एमपी में 65 हजार ट्राइबल शिक्षकों पर TET का संकट 2 साल में परीक्षा पास नहीं तो नौकरी खतरे में

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जनजातीय कार्य विभाग सख्त, शिक्षक संगठनों ने दी आंदोलन और रिव्यू पिटीशन की चेतावनी

 

रिपोर्ट:यश पांडे

मध्यप्रदेश में शिक्षकों के लिए एक बार फिर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के बाद अब जनजातीय कार्य विभाग ने भी करीब 65 हजार ट्राइबल शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य कर दी है। इस फैसले के बाद प्रदेशभर में शिक्षकों में असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है।

जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त तरुण राठी द्वारा जारी आदेश में सभी संभागीय व जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिक्षकों को इस परीक्षा की जानकारी दें और इसे अनिवार्य रूप से लागू करें।

 

2 साल में पास करनी होगी परीक्षा
आदेश के मुताबिक, ट्राइबल विभाग के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को दो साल के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश (सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 सहित अन्य मामलों) के पालन में लिया गया है। साथ ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत यह व्यवस्था लागू की जा रही है।

 

पहले से पास शिक्षक भी दायरे में!
सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि पहले से TET पास कर चुके शिक्षकों को भी दोबारा परीक्षा देनी पड़ सकती है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षक नाराज बताए जा रहे हैं और इसे अन्यायपूर्ण मान रहे हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट में जाएगी लड़ाई
इस आदेश के खिलाफ ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन का कहना है कि इस फैसले से आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमी हो सकती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।

 

बड़े आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। पहले भी TET को लेकर हुए फैसलों पर विरोध देखा जा चुका है।

 

निष्कर्ष:
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के नाम पर लिया गया यह फैसला अब शिक्षकों की नौकरी और आदिवासी बच्चों की पढ़ाई दोनों के लिए चुनौती बनता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

 

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