*35 साल का दर्द फिर छलका: खिरकिया ने रिफाइनरी छिनने का हिसाब मांगा*…… *जब छिन गई थी रिफाइनरी, अब मांग रहा हक: खिरकिया की सीएम डॉक्टर मोहन यादव पूर्व मंत्री कमल पटेल से बड़ी गुहार*…. …… *अधूरा सपना, अधूरा विकास: खिरकिया ने फिर उठाई औद्योगिक हक की आवाज* ……. *रिपोर्ट:यश पांडे*….. *खिरकिया नगर परिषद अध्यक्ष सीएम से करेंगी बड़ी मांग* *खिरकिया का दर्द: 1989 का सपना टूटा, अब सीएम डॉक्टर मोहन यादव ओर पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल से नई उम्मीद*


खिरकिया के औद्योगिक हक की फिर उठी मांग: सीएम से बड़े उद्योग की स्थापना का आग्रह
नगर परिषद ने सौंपा ज्ञापन, पेट्रोल रिफाइनरी परियोजना हटने का मुद्दा उठाया; युवाओं के रोजगार के लिए बड़े निवेश की मांग
रिपोर्ट यश पांडे
खिरकिया नगर परिषद अध्यक्ष ने बिल रिफाइनरी के खरकिया से चले जाने का अफसोस जताया
आज सीएम डॉक्टर मोहन यादव ओर पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल से बड़ी मांग करेंगी
खिरकिया के लोग में अभी तक एक बड़ी औद्योगिक इकाई जाने का दर्द है


हरदा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रस्तावित हरदा दौरे से पहले खिरकिया नगर परिषद ने क्षेत्र के औद्योगिक विकास को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है। परिषद द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में खिरकिया के “ऐतिहासिक औद्योगिक हक” की बहाली और क्षेत्र में बड़े उद्योग स्थापित करने की मांग की गई है।


ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 1989-90 में खिरकिया में पेट्रोल रिफाइनरी स्थापित करने की स्वीकृति मिली थी और इसके लिए उपयुक्त भूमि का चयन भी किया गया था। रेलवे लाइन और स्टेट हाईवे के बीच स्थित यह भूमि औद्योगिक दृष्टि से बेहद उपयुक्त मानी गई थी। लेकिन तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के चलते यह परियोजना खिरकिया से हटाकर अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दी गई, जिससे क्षेत्र विकास की दौड़ में पीछे रह गया।
नगर परिषद ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि आज भी वह चयनित भूमि उपलब्ध है और बुनियादी कनेक्टिविटी के कारण खिरकिया बड़े उद्योगों के लिए आदर्श स्थान है। परिषद ने मांग की है कि यहां पेट्रो-केमिकल हब, फूड प्रोसेसिंग प्लांट या टेक्सटाइल पार्क जैसे बड़े उद्योग स्थापित किए जाएं।
रोजगार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए बताया गया कि क्षेत्र के हजारों शिक्षित युवा आज भी रोजगार के अभाव में पलायन करने को मजबूर हैं। यदि खिरकिया में बड़े उद्योग स्थापित होते हैं, तो न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि आसपास के जिलों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
नगर परिषद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि खिरकिया के साथ हुए इस “ऐतिहासिक अन्याय” को सुधारते हुए क्षेत्र को औद्योगिक विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाए।




