*प्राचीन गोमुख मंदिर में बही नर्मदा पुराण की दिव्य धारा, गौमुख महिमा और गोपालन का हुआ भावपूर्ण वर्णन*…… *गोमुख धाम में नर्मदा पुराण कथा का अनुपम संगम, गौसेवा से मोक्ष तक का संदेश*……. *गोमुख मंदिर में नर्मदा पुराण कथा का चौथा दिन, गौमहिमा और नर्मदा परिक्रमा का महत्व बताया*


प्राचीन गोमुख मंदिर में नर्मदा पुराण कथा का दिव्य प्रवाह, गौमुख की महिमा एवं गोपालन का महत्व बताया
रिपोर्ट:यश पांडे


खिरकिया
नगर के प्राचीन एवं पावन गोमुख मंदिर में चल रही मां नर्मदा पुराण कथा के चौथे दिन भक्तिरस से सराबोर वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास पंडित श्री मधुसूदन जी शास्त्री ने गौमुख की महिमा, गोसेवा एवं गोपालन के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कथा के दौरान पंडित जी ने कहा कि भारत में आज जो भी धर्म और संस्कृति सुरक्षित है, वह सब मां के आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है। गोमाता को सनातन संस्कृति का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि गौसेवा से जीवन में धर्म अर्थ काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि स्वयं कामधेनु ने भी मां नर्मदा की परिक्रमा कर तपस्या की थी जिससे नर्मदा मैया का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। मां नर्मदा को जीवदायिनी पापनाशिनी और मोक्षदायिनी बताते हुए उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
कथा के चौथे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे और पूरे भक्ति भाव के साथ नर्मदा पुराण कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। कथा स्थल पर जय मां नर्मदा और हर-हर महादेव के उद्घोष से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक बन गया।
प्राचीन गोमुख मंदिर में चल रही यह नर्मदा पुराण कथा क्षेत्रवासियों के लिए आस्था, श्रद्धा और संस्कृति का जीवंत संगम बनी हुई है।




