*बागेश्वर धाम में 300 बेटियों का भव्य विवाह, खिरकिया की क्षमा ठाकुर बनीं सेवा की मिसाल*…… *खिरकिया की बेटी ने बढ़ाया क्षेत्र का मान, बागेश्वर धाम के सामूहिक विवाह में निभाई अहम भूमिका*….. *सेवा ही सच्ची पूजा: बागेश्वर धाम में 300 कन्याओं के विवाह में क्षमा ठाकुर का सराहनीय योगदान*….. …… *(देखें वीडियो)* *समर्पण और संस्कार की मिसाल: बागेश्वर धाम के विवाह समारोह में क्षमा ठाकुर की सक्रिय भागीदारी*…..


बागेश्वर धाम में 300 बेटियों का सामूहिक विवाह
खिरकिया की बिटिया श्रीमती क्षमा ठाकुर ने निभाई अहम सेवा भूमिका
रिपोर्ट:यश पांडे

हरदा/खिरकिया। सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता का भव्य संगम उस समय देखने को मिला जब बागेश्वर धाम में 300 बेटियों का गरिमामय सामूहिक विवाह समारोह संपन्न हुआ। यह पावन आयोजन प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित किया गया।


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देश के विभिन्न हिस्सों से आई जरूरतमंद बेटियों का विवाह विशाल पंडाल में अत्यंत सुव्यवस्थित व्यवस्था के बीच सम्पन्न हुआ। हजारों श्रद्धालु, समाजसेवी एवं दानदाता इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने। आयोजन का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहयोग प्रदान करना और सामाजिक एकता का संदेश देना रहा।
खिरकिया की बेटी बनी सेवा की मिसाल
इस भव्य आयोजन में खिरकिया की बिटिया क्षमा हनुमान सिंह ठाकुर ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
उन्होंने—
कन्याओं एवं उनके परिजनों की सेवा
भोजन व्यवस्था में सहयोग
आवश्यक सामग्री वितरण
अतिथियों के मार्गदर्शन
जैसे कार्यों में बढ़-चढ़कर योगदान दिया।
उनकी समर्पित सेवा भावना को आयोजन समिति एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने सराहा।
समाज सेवा ही सच्ची पूजा है”
श्रीमती क्षमा हनुमान सिंह ठाकुर ने कहा कि समाज सेवा ही सच्ची पूजा है और ऐसे आयोजनों में सहयोग करना प्रत्येक सक्षम नागरिक का कर्तव्य है। उनके अनुसार सामूहिक विवाह जैसे आयोजन जरूरतमंद परिवारों का आर्थिक बोझ कम करते हैं और समाज में भाईचारे एवं एकता को सुदृढ़ करते हैं।
क्षेत्र में गौरव की भावना
क्षेत्रवासियों ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि खिरकिया की बेटी ने पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से सामाजिक कार्यक्रमों को नई ऊर्जा मिलती है और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है।
यह आयोजन सेवा, संस्कार और सामाजिक सहयोग का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। क्षमा ठाकुर का योगदान निश्चित ही समाजहित में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।




