*खिरकिया :56 करोड़ का ओवरब्रिज और छुपी ड्राइंग: क्या खिरकिया की जनता से क्या डर रहा है प्रशासन*….. *जनता अंधेरे में, 56 करोड़ की योजना पर्दे में: ओवरब्रिज की ड्राइंग अब तक क्यों नहीं सार्वजनिक*….. ….. *बड़ा सवाल गांधी के साइड की आबादी का क्या होगा मार्केट वॉल्यूम खत्म होने के खतरे से जनता में डर*…. …. *क्या रेलवे अंडर ब्रिज को लेकर कुछ होगा ताकि शहर का यातायात सुचारू बना रहे रिपोर्ट:यश पांडे*

56 करोड़ के ओवरब्रिज पर प्रशासन की चुप्पी, जनता में बढ़ती बेचैनी
रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया।
खिरकिया नगर में प्रस्तावित 56 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ओवरब्रिज को लेकर जिला प्रशासन का रहस्यमय मौन अब जनता के बीच असमंजस में बदलता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी सार्वजनिक परियोजना होने के बावजूद अब तक न तो ओवरब्रिज की ड्राइंग सार्वजनिक की गई है और न ही डिजाइन, एलाइनमेंट या विस्तृत प्लान जनता के सामने रखा गया है।

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि
आखिर प्रशासन ओवरब्रिज की ड्राइंग जनता से क्यों छुपा रहा है?
क्या यह परियोजना जनता की सहूलियत के लिए है या जनता को अंधेरे में रखकर थोपी जा रही है?
गांधी चौक साइड की आबादी और बाजार में दहशत
विशेष रूप से रेलवे गेट के गांधी चौक साइड स्थित घनी आबादी और प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों व दुकानदारों में भारी असमंजस का माहौल है। व्यापारियों का कहना है कि यदि वर्तमान अनुमानित स्वरूप में ओवरब्रिज उतारा गया, तो
पूरा बाजार क्षेत्र प्रभावित होगा
दुकानों तक पहुंच बाधित होगी
वर्षों से स्थापित व्यापारिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं
मार्केट वॉल्यूम पूरी तरह समाप्त होने की आशंका है
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि गांधी चौक साइड रेलवे गेट पर ब्रिज का एक उचित उतराव (रैंप) आवश्यक है, साथ ही वहां मौजूद अंडरब्रिज का सुधार और सुदृढ़ीकरण भी बेहद जरूरी है, लेकिन इस पर भी प्रशासन मौन है।
बिना जनसुनवाई 56 करोड़ की योजना!
नगरवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने
न कोई जनसुनवाई की
न प्रभावित व्यापारियों व रहवासियों से संवाद किया
न ही परियोजना से जुड़े लाभ–हानि पर कोई आधिकारिक जानकारी दी
इतनी बड़ी सार्वजनिक राशि से बनने वाली योजना में पारदर्शिता का अभाव कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
जनता की स्पष्ट मांगें
नगरवासियों ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की है कि—
ओवरब्रिज की ड्राइंग, डिजाइन और एलाइनमेंट तुरंत सार्वजनिक की जाए
जनसुनवाई/सार्वजनिक संवाद आयोजित कर स्थानीय लोगों की राय ली जाए
यदि बाजार या मकान प्रभावित होते हैं, तो वैकल्पिक व्यवस्था और मुआवजा नीति स्पष्ट की जाए
गांधी चौक साइड रेलवे गेट और अंडरब्रिज के सुधार को योजना में शामिल किया जाए
अब बड़ा सवाल यही है
56 करोड़ की परियोजना में ड्राइंग सार्वजनिक करने से प्रशासन क्यों डर रहा है?
क्या जनता को जानने का हक नहीं कि उनके शहर का भविष्य किस दिशा में तय किया जा रहा है?
रेलवे अंडर ब्रिज की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है टेलीफोन एक्सचेंज के यहां रेलवे की पुलिया जिसे ओर बड़ा करने की जरूरत है जिससे व्यापार प्रभावित नहीं होगा
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