*जीवन मे यदि स्वयं को प्रतिकूलता नही चाहिए तो अन्य किसी के लिए प्रतिकूल मत बनो,,शांति समाधि साधना से मिलती है – पूज्य गुरुदेव गुलाबमुनिजी महाराज साहब*…… *महान आध्यात्मयोगी श्री गुलाब मुनि जी महाराज के 50 वे दीक्षा दिवस में प्रवेश पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब*…… *खिरकिया श्री संघ भी बना साक्षी, 2027 के चातुर्मास की जोरदार विनंती*







जीवन मे यदि स्वयं को प्रतिकूलता नही चाहिए तो अन्य किसी के लिए प्रतिकूल मत बनो,,शांति समाधि साधना से मिलती है – पूज्य गुरुदेव गुलाबमुनिजी महाराज साहब
महान आध्यात्मयोगी श्री गुलाब मुनि जी महाराज के 50 वे दीक्षा दिवस में प्रवेश पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब।
खिरकिया श्री संघ भी बना साक्षी, 2027 के चातुर्मास की जोरदार विनंती
रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया । अपनी आत्मा अनंत काल से विभिन्न योनियों में भटक कर दुखो को सहन कर रहा है, व्यक्ति के दुख कभी खत्म नही हुए क्योकि जीव दुख को खत्म करने की कोशिश करता है जबकि दुख के कारणों को खत्म करना जरूरी है ।जीवन मे यदि स्वयं को प्रतिकूलता नही चाहिए तो अन्य किसी के लिए प्रतिकूल मत बनो । शांति ,समाधि, साधना से मिलती है ।
उक्त उदगार संयम सुमेरु, कठोर साधक पूज्य गुरुदेव श्री गुलाबमुनिजी महाराज साहब ने श्री वर्धमान श्वेतांबर जैन श्री संघ बड़वाह के तत्वावधान में आयोजित गुरुदेव के पचासवें दीक्षा महोत्सव पर गुरु दर्शन को आए हजारो श्रावक, श्राविकाओं के बीच जैन स्थानक में प्रवचन देते हुए बताया।
गुरुदेव ने कहा कि साधन क्या है ? प्रतिकूल वस्तु, व्यक्ति और परिस्थितियों में भी जीव विचलित न हो उस स्थिति में भी समभाव रखकर यह सोचे कि यह सिर्फ मेरे कर्म का उदय है इसमें किसी का दोष नही है, और प्रतिकूलता में भी अनुकूल रहना, यही साधना है । संसार मे अपनो के प्रति आत्मिय भाव है तो वह राग है लेकिन संसार के समस्त जीवों के प्रति आत्मिय भाव आ जाये तो जीव का उत्थान हो जाएगा । जीवन को उन्नत बनाने के लिए सदबुद्धि होनी चाहिए । प्रत्येक जीव यदि पाँच बातो पर अमल कर ले तो उसका मोक्ष सरल हो जाएगा । इन पाँच बातो में पहली अपनी भुल को स्वीकार करने मे सरल भाव रखना, दूसरा आये हुए दुखो के प्रति स्वीकार भाव रखना, तीसरा मिले हुए सुख के प्रति संयम भाव रखना, चौथा पुरुषार्थ के परिणाम के अंदर संतोष भाव रखना और पांचवा उपकारी के प्रति समर्पण भाव रखना । जीव यदि ये पांच बाते जीवन मे उतार लें तो उसका कल्याण होना निश्चित है ।
इसके पूर्व पूज्य श्री कैलाशमुनिजी महाराज साहब ने कहा कि सम्यक सोच की सही पहचान क्या है ? यदि जीव पर शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक दुख आये सारी स्थिति प्रतिकूल हो फिर भी वह अपने स्वयं के कर्मो को ही दोषी माने अन्य किसी को नही तो यही सच्ची समझ है । जीव इस समझ से शीघ्रता से मोक्ष को प्राप्त कर लेता है ।
वही पूज्या श्री आशा जी महाराज साहब ने व्यक्ति को यदि सदा शांति समाधि और सुखी बनाना है तो दूसरे जीवो को सुखी शांति से रहने दो उनके सहयोगी बनो तो स्वयं दुखी नही बनोगे । पूज्य सतियां जी ने तीन बातें बताई जिनसे जीव सुखी रह सकता है पहली ज्यादा नही बोलना, दुसरी दर्शक दीर्घा और तीसरी मालिक नही मेहमान बनना । इन बातों पर अमल कर जीव स्वयं भी सुखी बन सकता है और दूसरों को भी सुखी कर सकता है ।
श्री संघ मंत्री राजेश मेहता ने बताया संयम सुमेरु, तपस्वी राज, प्रवचन प्रभावक पूज्य श्री गुलाबमुनिजी जी महाराज साहब की 50 वी दीक्षा दिवस के अवसर पर पूरे देश भर से सैकड़ो अनुयायी बडवाह एकत्रित हुए। साथ ही स्थानीय श्री श्वेतांबर जैन श्री संघ से अध्यक्ष अनिल मुनोत, संरक्षक हरीशचंद नागड़ा, ज्ञानचंद मेहता कोषाध्यक्ष विमल रांका, शांतिलाल मेहता, निर्मल विनायक,सुरेश बाफना, हुकम बनवट, सुरेश रैदासनी, हेमंत बोरा, सुरेन्द्र मेहता, शिखर भंडारी, आदेश चोपड़ा, आशीष श्री श्री माल,नितिन विनायक,पीयूष कोचर, आदेश विनायक, त्रिशल श्री श्री माल, श्राविकाओं में सरला देवी मुनोत किरण देवी मेहता,निर्मला देवी विनायक,विमला देवी रांका,उज्ज्वला बाफना, फ्रफुल्ला विनायक, संगीता विनायक, संगीता भंडारी, रश्मि श्री माल, दीपा विनायक,वर्षा रांका पूर्वी श्री श्री माल, श्रुति रांका,हिताशी श्रीश्री माल, ज्योति जैन, के अतिरिक्त महाराष्ट्र के जलगांव, आकोला सहित इंदौर, छनेरा, मुंदी, करही, बागोद, मण्डलेश्वर, पिपल्या, कतरगाव, कसरावद आदि अनेक स्थानों से आये श्रावक श्राविकाओं ने गुरुवाणी का लाभ लियाl










