*नववर्ष पर बच्चों के जीवन परिवर्तन का संकल्प, चारूवा में साध्वियों-सानिध्य में विशेष शिविर*….. ।।।।।।। …….. *31 दिसंबर से बच्चों के लिए संस्कारों की पाठशाला, चारूवा में परमार्थ विंटर शिविर*….. ……।।।।।।।…… *नववर्ष का जश्न नहीं, जीवन निर्माण का संकल्प चारूवा में बच्चों का विशेष शिविर*…. ……।।।।।।।।…… *मोबाइल से दूरी, संस्कारों से दोस्ती चारूवा में बच्चों के लिए आत्मिक शिविर* ।।।।।।।।।।……. *नववर्ष पर बच्चों को मिले संत-सतियों का सानिध्य चारूवा में होगा विशेष शिविर* …………………. ………… ।। *नववर्ष बनेगा संस्कार पर्व, चारूवा में बच्चों का विशेष आत्मिक शिविर*। ……….. ⬇️⬇️ *नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें*⬇️⬇️ 👇👇👇👇👇👇 ✍️ *शीघ्र रजिस्ट्रेशन कर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें*





31 दिसंबर का नववर्ष संकल्प बदलेगा जीवन की दिशा,
चारूवा में साध्वियों-सतियों के सानिध्य में ‘परमार्थ विंटर से आत्मा में इंटर शिविर’ का आयोजन
रिपोर्ट:यश पांडे
खिरकिया/चारूवा।
आधुनिक भौतिकता और दिखावटी उत्सवों से हटकर नववर्ष को संस्कार, साधना और आत्मिक उन्नयन से जोड़ने की अनूठी पहल की जा रही है। 31 दिसंबर को सामान्य मनोरंजन में समय व्यतीत करने की बजाय, 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक चारूवा में शासन दीपिका प्रज्ञा श्री जी म.सा. (ठाणा-4) के पावन सानिध्य में 9 से 30 वर्ष तक के अविवाहित बच्चों एवं युवाओं के लिए “परमार्थ विंटर से आत्मा में इंटर शिविर” का आयोजन किया जा रहा है।


इस विशेष शिविर का उद्देश्य नई पीढ़ी को संस्कारवान, सकारात्मक, साहसी एवं आत्मिक रूप से सशक्त बनाना है। आयोजकों के अनुसार यह शिविर केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन की दिशा में एक सशक्त कदम है, जिससे युवाओं में नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास एवं अनुशासित जीवन शैली का विकास होगा।
शिविर प्रतिदिन दोपहर 11:30 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित होगा। इसमें खेल-खेल में ज्ञानार्जन, गेट-टू-गैदर, गेम्स, विभिन्न रचनात्मक गतिविधियाँ, मोटिवेशनल सत्रों के साथ-साथ प्रतिदिन आकर्षक पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे। शिविरार्थियों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई है।
साथ ही प्रतिभागियों एवं वालेंटियरों की सुविधा हेतु “समता दीप, खिरकिया” से प्रतिदिन 11:10 बजे तक वाहन सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
आयोजकों ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि जो बच्चे बाहर पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें भी पुण्य अवसर प्राप्त हो रहा है। ऐसे में उन खिलते पुष्पों और महकती कलियों को इस आध्यात्मिक, सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत की जाए।
पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का निर्णय आज स्वयं करना होगा, क्योंकि यही निर्णय कल समाज और राष्ट्र के चरित्र का निर्माण करेगा।










