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*खिरकिया वार्ड 8 की कॉलोनी में कॉलोनीनाइजर की वादाखिलाफी से नारकीय जीवन, प्रशासन बना मूकदर्शक*… .*कांग्रेस प्रवक्ता अनुरूप बॉयबर ने प्रशाशन को घेरा*




खिरकिया वार्ड 8 की कॉलोनी में कॉलोनीनाइजर की वादाखिलाफी से नारकीय जीवन, प्रशासन बना मूकदर्शक




खिरकिया (संवाददाता) – खिरकिया नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 8 में स्थित कॉलोनी के रहवासी इन दिनों मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। कॉलोनीनाइजर द्वारा किए गए वादों के विपरीत यहां आज तक न तो सड़कें बनी हैं, न नालियां, न ही प्रकाश की व्यवस्था है।
निवासियों ने बताया कि कॉलोनीनाइजर जेपी हाड़ा द्वारा इस कॉलोनी का निर्माण कराया गया था। प्लॉट विक्रय के समय सभी मूलभूत सुविधाएं — जैसे सड़क, नाली, लाइट, पार्क और साफ-सफाई — उपलब्ध कराने का वादा किया गया था, लेकिन लगभग 10–12 वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई सुविधा नहीं दी गई। कॉलोनी में नालियों के अभाव में गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है, जिससे मच्छरों का प्रकोप और बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि कॉलोनी में बिजली की व्यवस्था भी अव्यवस्थित है। कॉलोनीनाइजर द्वारा नगर परिषद या बिजली विभाग से समुचित अनुमति लिए बिना निजी ट्रांसफॉर्मर लगाकर व्यवस्था की गई थी, जिससे बार-बार बिजली संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
निवासियों ने इस गंभीर समस्या को लेकर अनुविभागीय अधिकारी खिरकिया को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में तीन प्रमुख बिंदु उठाए गए हैं—
कॉलोनी को नगर परिषद खिरकिया में पंजीकृत कॉलोनी के रूप में दर्ज किया जाए।
कॉलोनी का टी.एन.सी.पी. से अनुमोदन प्रमाणपत्र (अनापत्ति पत्र) अब तक नहीं मिला है, उसे स्पष्ट किया जाए।
रेरा अधिनियम 2016 के तहत कॉलोनीनाइजर पर कार्रवाई की जाए।
निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि कॉलोनी की समुचित जांच कर दोषी कॉलोनीनाइजर पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी नागरिकों के साथ इस तरह की वादाखिलाफी न कर सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खिरकिया में इस तरह की कई कॉलोनियां हैं जहां कॉलोनीनाइजरों ने नागरिकों को झूठे वादे कर प्लॉट बेचे, लेकिन विकास कार्य नहीं कराए। ऐसे मामलों में नगर परिषद और प्रशासन की निष्क्रियता से आमजन में आक्रोश है।
निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही कॉलोनी में सड़क, नाली, लाइट आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को बाध्य होंगे इसकी सम्पूर्ण जवाबदारी प्रशासन की होंगी





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