*जंगल मार्ग से विहार कर रहे महान मौन साधक पूज्य शीतल राज जी म.सा., काली घोड़ी से आवंलिया की ओर किया विहार*





जंगल मार्ग से विहार कर रहे महान मौन साधक पूज्य शीतल राज जी म.सा., काली घोड़ी से आवंलिया की ओर किया विहार
रिपोर्ट:यश पांडे



खिरकिया। जब एक शक्ति दूसरी शक्ति के स्थान पर पहुंचती हैं तो मानो अतिरिक्त ऊर्जा का संचार होता है। ऐसी ही एक शक्ति तपसाधक श्री शीतलराजजी म.सा. आड़ा आसान (सोना) त्यागकर साधना कर रहे है। अपनी दीक्षा के लगभग 60 बसंत पूर्ण कर चुके महायोगी फक्कड़ संत लगभग 50 वर्ष से एकासना तप धारी पूज्य गुरु शीतल राज जी मसा बैतूल से वर्षावास पूर्ण कर जंगल में विहार करते हुए काली घोड़ी पहुंचे। काली घोड़ी काली माता के प्रसिद्ध शक्तिपीठ के प्रसिद्ध है। गुरुदेव का आंवलिया होकर फिलहाल आशापुर छनेरा पहुंचेंगे। आगे बड़वाह, करही इंदौर की संभावना रहेगी। गुरुदेव का आगामी वर्षवास शाजापुर संभावित रहेगा। काली घोड़ी से आंवलिया तक का विहार श्री संघ खिरकिया के सदस्यों द्वारा कराया गया,। जानकारी देते हुए श्री संघ संरक्षक ज्ञानचंद मेहता एवं आशीष श्रीश्री माल ने बताया इस अवसर पर छनेरा, जयपुर, बालाघाट, दुर्ग, काला पीपल सहित अन्य स्थानों के गुरु भक्त थे। उन्होने बताया कि पूज्य गुरुदेव कठोर तपसाधक श्री शीतलराजजी म.सा. स्थानकवासी पंरपरा के एक प्रभावशाली संत रत्न है। आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी है। 19 फरवरी1970 को आपने 22 वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण कर वैराग्य धारण किया। आप की भीष्म प्रतिज्ञा है कि कभी लेटकर नींद नही लूंगा। उहन्होने विगत 54 वर्षों से आड़ा आसान त्यागकर लेटकर नींद नही ली है। आप विगत 34 वर्षों से सूर्य की अतापना लेते हुये प्रतिदिन दोप. 12 से 2 व सांयकाल 7 से 9 मौन साधना का पालन कर प्रति सोमवार और गुरुवार पूर्ण मौन साधना मे रहते है। 24 वर्षों से एकासना व्रत का पालन कर रहे है। गुरु आज्ञा को सहज शिरोधार्य कर मुनिश्री ने नितांत कठिन सेवा कार्यों का अगाध धीरता एवं सहिष्णुता का परिचय देते हुये बड़ी योग्यता पूर्वक निष्पादन किया। आचार्य श्री हस्तीमलजी म.सा. के मुखारविद से मुनिश्री को 1976 में “कुशलसेवा मूर्ति“ अलंकरण से विभूषित किया गया। छत्तीसगढ़ प्रवर्तक वाणीभूषण पूज्य श्री रतनमुनिजी महाराजजी के सानिध्य में अक्षय तृतीया के पावन दिवस 13 मई 2013 को मुनिश्री को “महात्मा“ पद से विभूषित किया गया। श्रमण संघीय प्रर्वतक श्री रमेशमुनिजी की आज्ञा से उप प्रर्वतक श्री गौतममुनिजी द्वारा 20 जनवरी 2019 को आचार्य श्री की 109 वी जन्मजयंती व मुनि श्री के 71 वे जन्मदिवस पर गुरु भगवत द्वारा मुनिश्री को “महास्थविर“ पद से अलंकृत कर चादर भेंट की गई। श्रमणसंघीय युवाचार्य श्री महेन्द्रऋषि जी म.सा. के बालाघाट में साधना से शिखर की ओर शीतल किताब के उद्घाटन के अवसर पर दि. 17.04.2022 को युवाचार्य जी ने “महासाधक“ के पद से अलंकृत कर चादर भेंट की गई। परम पूज्य श्री शीतल राज जी म.सा को दि. 29.09.2024 सामायिक स्वाध्याय सम्मेलन, रायपुर में देश विदेश से आये हजारो श्रावक श्राविकाओं व संघ प्रमुख की साक्षी मे उपस्थित सकल जैन समाज एवं श्री शीतल चार्तुमास समिती, रायपुर के तत्वाधान मे परम पूज्य गुरुदेव को “वचन सिध्दी धारी“ की उपाधि से अलंकृत किया गया। उनका व्यक्तित्व चंद्र सा शीतल व प्रकाशमय है। मसा श्री ने समग्र जीवन त्याग, वैराग्य और संयम साधना मे परिपूर्ण है। आज युवा पीढी को व्यसन मुक्त जीवन की प्रेरणा देते हुये सुखमय जीवन जीने की कला का प्रचार प्रसार कर रहे है। जीवन मे सामायिक स्वाध्याय की प्रेरणा से लाखो सामायिक प्रेमी आपके भक्त है। आप साधना करते हुये जैन आगमो के पारायण से प्राप्त दिव्य ज्ञान के अमृत को मौन मांगलिक के रूप मे जन जन को वितरित कर समाज पर महान उपकार कर रहे है।
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