*एमपी में ई-अटेंडेंस पर बड़ा अपडेट हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला*…. *कहा व्यवस्था में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं, सभी शिक्षकों को लगानी होगी ऑनलाइन उपस्थिति*





एमपी में ई-अटेंडेंस पर बड़ा अपडेट — हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
कहा – व्यवस्था में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं, सभी शिक्षकों को लगानी होगी ऑनलाइन उपस्थिति
रिपोर्ट:यश पांडे

जबलपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों की ओर से दायर उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें ई-अटेंडेंस व्यवस्था को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
अतिथि शिक्षकों की ओर से अशोकनगर निवासी सुनील कुमार सिंह ने यह याचिका दायर की थी।
मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने राज्य सरकार के पक्ष को सही ठहराया।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता निलेश यादव ने दलील दी कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई है और इसमें कोई कानूनी बाधा नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने यह तर्क दिया था कि ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या है और कई शिक्षकों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं।
हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को अस्वीकार कर दिया।
इस फैसले के बाद अब 1 जुलाई 2025 से प्रदेशभर के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए ई-अटेंडेंस लगाना अनिवार्य रहेगा।
यदि उपस्थिति दर्ज नहीं की गई तो मानदेय जारी नहीं किया जाएगा।

संक्षेप में:
हाईकोर्ट ने ई-अटेंडेंस पर रोक लगाने से किया इनकार
सरकार का आदेश वैध माना गया
नेटवर्क व मोबाइल की दलीलें खारिज
सभी शिक्षकों को अब ई-अटेंडेंस लगाना अनिवार्य







