मध्य प्रदेश

*नगर परिषद अध्यक्ष पति ने बैठक कर कहा नगर की प्रथम महिला का अपमान हुआ है* *मुख्यमंत्री के खिरकिया आगमन पर नगर परिषद अध्यक्ष को नहीं मिला मंच*…. ..*भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा हेलीपेड पर स्वागत में नाम दिया था*.. .*प्रदेश स्तरीय शासकीय कार्यक्रम था उसमें अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी*. …. ….*नगर परिषद उपाध्यक्ष विजयंत गौर ने कहा बैठक में एक भी भाजपा पार्षद नहीं ओर मंडल के पदाधिकारी भी नहीं पार्षदों ओर वार्डो की समस्या पर बात क्यों नहीं*

रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया में तीन दिन पहले मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव का शिक्षा विभाग आर टी ई को लेकर प्रदेशस्तरीय कार्यक्रम था कार्यक्रम था

खिरकिया नगर परिषद अध्यक्ष पति महेंद्र सिंह खनूजा ने कल खिरकिया में एक धर्मशाला में बैठक कर बताया ओर प्रेस नोट प्रेषित कर अवगत कराया कि नगर की प्रथम महिला को मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव से नहीं मिलने दिया और मंच पर उन्हें नहीं बुलाया ये उनका अपमान है

उपरोक्त घटनाक्रम को लेकर हमारी बात भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश वर्मा से हुई है उन्होंने बताया जिले की चारो नगर पालिका नगर परिषद अध्यक्षों के नाम स्वागत के लिए हेलीपेड पर दिए थे सभी ने स्वागत किया मुख्यमंत्री जी का कार्यक्रम प्रदेश स्तरीय था नगर परिषद अध्यक्षों के नाम दिए थे पर प्रशाशन से अनुमति नहीं मिली सभी महिला जन प्रतिनिधियों को सम्मान का मौका दिया गया था

नगर परिषद खिरकिया में उपाध्यक्ष विजयंत गौर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में इसका जवाब दिया और कहा बैठक में पार्षद ओर भाजपा मंडल के पदाधिकारी उपस्थित नहीं थे पार्षदों की अपनी समस्या है उनके वार्डो में काम नहीं हो रहे है पार्षदों के साथ भेद भाव हो रहा है

खिरकिया नगर परिषद अध्यक्ष द्वारा जारी प्रेस नोट

खिरकिया नगर परिषद अध्यक्ष का अपमान बना बड़ा मुद्दा

खिरकिया।खिरकिया की पहली महिला नगर परिषद अध्यक्ष इंद्रजीत कौर महेंद्र सिंह खनूजा के साथ हुआ अपमान अब नगर से लेकर जिले तक राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिरकिया आगमन पर नगर परिषद की ही अध्यक्ष को मंच पर जगह नहीं दी गई। नगर की प्रथम नागरिक, महिला और अल्पसंख्यक सिख समाज से आने वाली अध्यक्ष को दरकिनार करना लोगों के दिल को गहराई से चोट पहुँचा गया है।
संगठन के दबाव और प्रेशर की राजनीति के बीच जब कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों ने खुला समर्थन किया तो नगर में सहानुभूति की लहर दौड़ गई। सवाल यह है कि भाजपा, जो नारी सम्मान और सशक्तिकरण का नारा बुलंद करती है, क्या अपनी ही महिला अध्यक्ष का मान बचाएगी या दबाव की राजनीति हावी रहेगी।
अध्यक्ष को दो-दो नोटिस, इस्तीफे का दबाव*
अध्यक्ष बनने के बाद से ही संगठन और कुछ पार्षदों ने इंद्रजीत कौर का विरोध शुरू कर दिया था। यहां तक कि अविश्वास प्रस्ताव तक की कोशिश हुई। मामला ठंडा पड़ने पर संगठन ने उन्हें दो बार नोटिस दिए और इस्तीफे का दबाव बनाया।
लेकिन अध्यक्ष ने साफ कहा — “यदि मैंने कोई गलती की है तो सामने रखिए, तभी इस्तीफा दूंगी।”
मंच पर गैर-जनप्रतिनिधि बैठे, अध्यक्ष को नजरअंदाज
29 सितंबर को सीएम के दौरे पर नगर परिषद का ही कार्यक्रम था। बावजूद इसके अध्यक्ष को मंच पर जगह नहीं दी गई। मंच पर गैर-जनप्रतिनिधियों को भी बैठाया गया, परंतु नगर की प्रथम महिला अध्यक्ष को दूर रखा गया।
लोगों का कहना है कि यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि नगर और सिख समुदाय का अपमान है, जिसने हमेशा भाजपा को समर्थन दिया।
सड़क पर रोककर सौंपी समस्याओं की सूची
मंच से दूर किए जाने के बाद भी अध्यक्ष पीछे नहीं हटीं। उन्होंने सड़क पर ही मुख्यमंत्री का स्वागत किया और नगर की 10 से 15 प्रमुख समस्याओं की सूची ज्ञापन के रूप में सौंपी। यह कदम उनके नगर के विकास के प्रति संकल्प को दर्शाता है।
कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों का खुला समर्थन
30 सितंबर को नार्मदीय धर्मशाला में 100 से 150 कार्यकर्ता, समाजसेवी और व्यापारी जुटे। बैठक में सर्वसम्मति से अध्यक्ष का समर्थन किया गया और साफ कहा गया कि किसी भी परिस्थिति में वे पार्टी न छोड़ें।
नगर के प्रभावशाली चेहरों ने भी ऐलान किया कि वे खनूजा दंपत्ति के साथ मजबूती से खड़े हैं।
नगर में सहानुभूति की लहर
अध्यक्ष के पति महेंद्र सिंह खनूजा दशकों से भाजपा के कट्टर समर्थक रहे हैं। पहली बार उनके परिवार को नगर परिषद की बागडोर मिली। अब दबाव की राजनीति ने नगर में सहानुभूति की लहर पैदा कर दी है। लोग पूछ रहे हैं —
“क्या भाजपा, जो नारी सशक्तिकरण की बात करती है, अपनी ही महिला अध्यक्ष का सम्मान करेगी या फिर राजनीति के दबाव में उन्हें हटाने की कोशिश होगी?
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