*ज्ञान हमे जीवन में सरलता एवं झुकना सिखाता है:- साध्वी प्रज्ञा श्री जी।* *हम किसी को सम्मान देंगे तो स्वयं भी सम्मान पाएंगे।* *तप आराधिका सुनंदा कोचर ने 11 उपवास के पचखान ग्रहण किए।*

ज्ञान हमे जीवन में सरलता एवं झुकना सिखाता है:- साध्वी प्रज्ञा श्री जी।
हम किसी को सम्मान देंगे तो स्वयं भी सम्मान पाएंगे।
तप आराधिका सुनंदा कोचर ने 11 उपवास के पचखान ग्रहण किए।
रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया:दिनांक

10/10/2025 दिन सोमवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की आज्ञानुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी महाराज साहब ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पानी को जब अग्नि पर रखा जाता है तो वह भाप बन जाता है और भाप ठंडी होकर पुनः पानी में बदल जाती है। यह चक्र चलता रहता है। इसी प्रकार बचपन भी धीरे-धीरे जवानी में और जवानी बुढ़ापे में बदल जाती है। कोई भी व्यक्ति बुढ़ापा नहीं चाहता पर यह स्थिति जीवन में धीरे-धीरे घटित होती ही है। और इस परिस्थिति के साथ हमें समझौता करना ही पड़ता है। यदि हम इसके साथ खुद को नहीं बदलेंगे तो हम दुखी ही रहेंगे। सभी का क्षयोपक्षम अलग-अलग रहता है हम दूसरों को स्वयं के हिसाब से नहीं बदल सकते है। यदि ज्ञान के साथ अहंकार है विनम्रता नहीं है तो वह ज्ञान मात्र मस्तिष्क का भार है। ज्ञान हमें जीवन में सरलता सीखाता है,झुकना सीखाता है। महापुरुषों के जीवन से हमें सद् शिक्षा मिलती है उन्हें मात्र दिमाग में नहीं भरना है बल्कि जीवन में उतरना है। बड़े भी यदि समय-समय पर छोटों को सम्मान देंगे तो वह स्वयं भी सम्मान पाएंगे। यह उनकी ओर से छोटों के लिए विनम्रता ही है। विनय का तात्पर्य छोटे-बड़े सभी को सम्मान देना होता है। आगे कहा कि बहन सुनंदा जी कोचर ने पूर्व में भी मासक्षमण जैसी बड़ी तपस्या की है आज आपने 11 उपवास पौषध के साथ कर दृढ़ मनोवल का परिचय दिया।
महासतियाजी महाराज साहब के दर्शन,वंदन एवं सदसानिध्य का लाभ बड़वाह,कसरावद आदि स्थानों के गुरु भक्तों ने लिया।
तपस्या के क्रम में म.सा.के मुखारविंद से 11 उपवास के पचखान सुनंदा अनिल कोचर के ग्रहण किए।प्रतिदिन श्रावक श्राविकाओं द्वारा रात्रि संवर भी गतिमान है।
धर्म सभा का संचालन आशीष समदड़िया ने किया।
तप अनुमोदना में अभिव्यक्ति कोचर परिवार की बहुओं ने एवं रूपेश भंडारी दी।तप की सभी ने खूब खूब सराहना की।अन्य तपस्या भी प्रवर्धमान है।




