**नवरात्रि का तीसरा दिन** *माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप — माँ चंद्रघंटा को समर्पित होता है।* *बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने बताया पूजा का महत्व* ….*(देखे वीडियो)*

**नवरात्रि का तीसरा दिन** माँ दुर्गा के **तीसरे स्वरूप — माँ चंद्रघंटा** को समर्पित होता है।

रिपोर्ट:यश पांडे
बागेश्वरधाम सरकार पंडित धीरेन्द्र शास्त्री जी ने बताया महत्व
🌸 **माँ चंद्रघंटा की विशेषताएँ:**
* माँ का यह रूप अत्यंत **शांत**, **सौम्य**, लेकिन **रणचंडी** भी होता है।
* उनके मस्तक पर **अर्धचंद्र के आकार की घंटी (चंद्रघंटा)** होती है, जिससे उनका नाम पड़ा “चंद्रघंटा”।
* उनके दस हाथ होते हैं, जिनमें अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते हैं।
* उनका वाहन **सिंह** होता है, जो **शौर्य और वीरता** का प्रतीक है।
* माँ का यह स्वरूप **शत्रुओं का नाश** करने वाला है और भक्तों को **भय से मुक्ति** देता है।
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### 🛕 **पूजा विधि (तीसरे दिन की पूजा):**
1. सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें।
2. पूजा स्थल की सफाई करें और माँ चंद्रघंटा की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
3. रोली, चावल, फूल, अक्षत, दीपक, धूप आदि से माँ की पूजा करें।
4. माँ को **केसर युक्त खीर**, **सुगंधित पुष्प**, और **सफेद रंग की चीज़ें** चढ़ाना शुभ होता है।
5. **दुर्गा सप्तशती** का पाठ या “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” मंत्र का जप करें।
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### 🧘♀️ **आध्यात्मिक महत्व:**
* माँ चंद्रघंटा की पूजा से **मानसिक शांति**, **धैर्य**, और **आत्मविश्वास** प्राप्त होता है।
* साधक की **आंतरिक शक्ति जाग्रत** होती है और **नकारात्मक ऊर्जा** का नाश होता है।
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