धर्म

*जैसी संगत वैसी रंगत-साध्वी प्रज्ञा श्री जी।* *हमें गुरु को चर्चा का नहीं चर्या का विषय बनाना है -साध्वी प्रेक्षा श्री जी*

जैसी संगत वैसी रंगत-साध्वी प्रज्ञा श्री जी।

हमें गुरु को चर्चा का नहीं चर्या का विषय बनाना है -साध्वी प्रेक्षा श्री जी

रिपोर्ट:यश पांडे


खिरकिया :- दिनांक 01/09/2025 दिन सोमवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की अज्ञानुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी म. सा. ने कहा कि – संसारी लोग सिर्फ दो जगह पर ही सुखी रह सकते हैं पहला -भगवान के पास ।दूसरा -भाग्यवान के पास। यदि हमें सुख की अनुभूति चाहिए तो हमें इन दोनों की संगति जरूरी है जैसी संगत वैसी रंगत ।भगवान के पास जाने का यह तात्पर्य है कि भगवान ने जैसा धर्म बताया है उसके अनुरूप आचरण करना और भाग्यवान के पास का तात्पर्य है कि गुणवान व्यक्ति के सानिध्य में रहना ।गुणहीन व्यक्ति के पास नहीं क्योंकि संगत देखकर ही लोग आपके बारे में टिप्पणी करते हैं।

इसके पूर्व श्री प्रेक्षा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि -गुरु की पूजा करने के लिए जीवन में ऐसा दृढ़ संकल्प लाया जाए की मैं कभी भी साधु संतों की निंदा नहीं करूंगा ।हमें गुरु को चर्चा का नहीं चर्या का विषय बनाना है ।उन्होंने आगे कहा कि- हमें चरित्र आत्माओं की वंदना ऐसे उत्कृष्ट भावों से करना चाहिए कि उनके भीतर में रहे ज्ञान, दर्शन ,चारित्र हमारे भीतर में प्रकट हो जाएं।
म. सा. के मुखारविंद से प्रतीक्षा श्री जी म.सा. की सांसारिक भतीजी 14 वर्षीय वर्तिका पंकज भंडारी ने दृढ़ आत्म मनोवल का परिचय देते हुए 8 उपवास के पचखान ग्रहण किए। इस अवसर पर श्रावक -श्राविकाएं एवं श्रद्धशील गुरु भक्त उपस्थित थे।
धर्म सभा का संचालन आशीष समदड़िया ने किया।
महासतीया जी के दर्शनार्थ धमतरी से पधारे निरामय श्री जी म.सा.के सांसारिक वीर पिता कमलेश कोटड़िया वीर माता संजू कोटड़िया उपस्थित रहे संजू कोटड़िया ने अपने अभिव्यक्ति में खिरकिया संघ के गुरुभक्तों की सराहना की।तप अनुमोदना में मौसमी भंडारी एवं भंडारी परिवार की बहुओं ने अपने भाव रखे।प्रभावना का लाभ पंकज हेमचंद भंडारी ने लिया।

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