धर्म
*वक्त का पता नहीं लगता है अपनों के साथ,पर अपनों का पता लगता है वक्त के साथ*।” :- *साध्वी श्री प्रज्ञा श्री जी*

“वक्त का पता नहीं लगता है अपनों के साथ,पर अपनों का पता लगता है वक्त के साथ।” :- साध्वी श्री प्रज्ञा श्री जी।
रिपोर्ट:,यश पांडे
खिरकिया-दिनांक 17 /08/2025 दिन रविवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की आज्ञानुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी महाराज साहब अपने धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया कि मनुष्य इन तीन कारणों से निरंतर टेंशन में रहता है पहला जो नहीं मिला है उसकी लालसा करना दूसरा जो मिला है उसके प्रति ममत्व भाव रखना और तीसरा जो भोग लिया है उसकी स्मृति करके दुखी होना। जहां चिंता है वहां-वहां आर्तध्यान है। आज सहनशक्ति का अभाव है आप जरा विचार कीजिए कि क्या आपकी साधना का यही सार है। सुखी होना साधना है दुखी होना नहीं। किसी ज्ञानी ने सच्ची कहा है कि “वक्त का पता नहीं लगता है अपनों के साथ, पर अपनों का पता लगता है वक्त के साथ।”
जीवन में सफल होने के लिए लक्ष्य निर्धारण आवश्यक हैं:- साध्वी प्रेक्षा श्री जी।
श्री प्रेक्षा श्री जी महाराज साहब ने बताया की जीवन में सफल होने के लिए लक्ष्य का निर्धारण करना बहुत जरूरी है। लक्ष्य निर्धारित होने के साथ-साथ कड़ी मेहनत भी जरूरी है। भगवान ने कहा है की पाठशाला ऐसी टकसाल है जहां जड़ सिक्के नहीं जीवंत सिक्के डाले जाते हैं। आज माता-पिता बच्चों पर प्रेशर बनाना जानते हैं पर प्रेरणा करना नहीं जानते। व्यक्ति परिस्थिति का सामना करना सीखेगा जब ही सामने बोलना छोड़ेगा।
मयूर विनायक्या ने 7 उपवास पश्चात पारणा किया।
अनिकेत भाऊ मोहिते ने आज म.सा.के मुखारविंद से 6 उपवास एवं तेले की लड़ी में ओम मुछाला कालधड़ ने ग्रहण किए।
दर्शन सानिध्य का लाभ मानवर, मक्सी,बाबई, कालधड़ आदि के श्रद्धानिष्ठ गुरुभक्त उपस्थित हुए। संचालन आशीष समदड़िया ने किया।






