*साधु – संत जब हमारे घर पधारते है तो वह हमें तारने आते है:- साध्वी श्री प्रज्ञा श्री जी* *जो काम दवा नहीं कर पाती वो काम दुआ कर जाती है:- साध्वी श्री प्रशस्ति श्री जी*

साधु – संत जब हमारे घर पधारते है तो वह हमें तारने आते है:- साध्वी श्री प्रज्ञा श्री जी।
जो कम दवा नहीं कर पाती वो काम दुआ कर जाती है:- साध्वी श्री प्रशस्ति श्री जी।
(प्रतिदिन खिरकिया समता भवन में साध्वियों के द्वारा हो रहे जिनवाणी रूपी प्रवचन सुबह 9 से 10 बजे तक)

खिरकिया :-दिनांक 12/08/2025 दिन मंगलवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की आज्ञानुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी महाराज साहब ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया कि नम्रता का स्वर लोहे में भी प्रवेश कर जाता है, जबकि अहंकार का स्वर कपास में भी प्रवेश नहीं कर पता है। ज्यादा चिल्लाने में नुकसान आपका ही है। भले ही आपके वचन हित हो पर यह कठोरता आपको नीचे गिरने वाली है। क्रोधी स्वभाव वाला शिष्य मृदु स्वभाव वाले गुरु को भी क्रोधी बना देता है। और मृदु स्वभाव वाला शिष्य क्रोधी स्वभाव वाले गुरु को भी मृदु बना देता है। यदि आप क्रोधी हो तो सामने वाला क्लेश ना बड़े इसलिए आपकी बात मान सकता है पर वह दिल से उसे स्वीकार कभी नहीं करता है। साधु संत जब हमारे घर पधारते हैं तो वह हमें तारने आते हैं वह हमें बहुत कुछ देने आते हैं ना कि हमसे लेने आते हैं। कायर व्यक्ति कभी चुनौती स्वीकार नहीं करते हैं चुनौती को स्वीकार करने वाले शूरवीर होते हैं।
इसके पूर्व श्री प्रशस्ति श्री जी महाराज साहब ने बताया कि सुखी होने का तीसरा सूत्र है सुख बांटे। सुख देने से सुख तथा दुख देने से दुख मिलता है। हमारे पास जो धन संपत्ति है यदि उसका हम सदुपयोग करेंगे तो हम भूखे को भोजन, प्यासे को पानी और रोगी को दवा देकर सुखी बना सकते हैं। यदि उन्हें सुख मिला तो वह हमें शुभ वचनों से आशीर्वाद देते हैं। कहते हैं जो काम दवा नहीं करती वह काम दुआ कर जाती है ।यदि हमें दुआ चाहिए तो हमें वैसे काम भी करना पड़ेंगे। आज हमारे घर तो बड़े-बड़े हैं फिर भी हम किसी को ठहरने का स्थान नहीं दे पाते हैं। यदि हम दूसरों को सुख बांटते थे हैं तो हमारी आत्मा निरंतर मुक्ति के पथ पर अग्रसर होती जाती है ।
साध्वीवर्याओ के दर्शन,सानिध्य एवं प्रवचनों का लाभ लेने बाबई से श्री मधुर मुनिजी म.सा. के सांसारिक मामाजी अशोक गोलछा मामीजी कंचन गोलछा,देवास से पधारे गुरुभक्त गोविंद स्वर्णकार सोनी, चारूवा आदि से गुरुभक्त उपस्थित रहे। म.सा.के मुखारविंद से 3 उपवास के पचखान मयूर (नयन) विनायक्या ने ग्रहण किए। धर्म सभा में संचालन मधुर मुनिजी म. सा. सांसारिक भतीजी भूमिका समदड़िया द्वारा किया गया। यह समाचार प्रियंका सुमित सांड ने प्रदान किए।




