धर्म

*मन की तरंगे पावरफुल होती है -साध्वी प्रज्ञा श्री जी* *कर्मों की निर्जरा का साधन एकाग्रता -साध्वी प्रशस्ति श्री जी*

मन की तरंगे पावरफुल होती है -साध्वी प्रज्ञा श्री जी

कर्मों की निर्जरा का साधन एकाग्रता -साध्वी प्रशस्ति श्री जी

रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया-दिनांक 06 -08-2025 दिन बुधवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की आज्ञानुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी महाराज साहब ने संबोधित करते हुए कहा कि किसी महापुरुष ने कहा है की स्वाद तन को बिगाड़ता है, प्रमाद जीवन को बिगाड़ता है और विवाद मन को बिगाड़ता है। आजकल मैदे के ज्यादा उपयोग से बच्चों का छोटी उम्र में ही पेट खराब हो रहा है। मैदा आंतों के लिए सीमेंट का काम करता है जाकर आंतों में चिपक जाता है। और पेट की समस्याओं को जन्म देता है। उसी प्रकार प्रमाद का तात्पर्य है उत्साह न होना। हम संसार के कार्य तो बहुत उत्साह के साथ करते हैं पर धर्म कार्यों में हमारा उत्साह नजर नहीं आता है। सोचते हैं आज नहीं किया तो कल कर लेंगे।पर शुभ कार्य को यदि आप कल पर डालते हैं तो वह आपके लिए अभिशाप बन जाएगा। और यदि अशुभ कार्य को आप कल पर डालते हैं तो वह आपके लिए वरदान बन जाता है। शायद अशुभ कार्य कल पर टालने से आने वाली कोई विपत्ति टल जाए। एक दूसरे के विचारों में समन्वय ना होतो विवाद होता है। कभी भी प्याज के छिलके नहीं उतारना चाहिए वरना हाथ में कुछ नहीं बचेगा। जैसे शुभ विचार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाते हैं ऐसे ही अशुभ विचार भी सामने वाले को प्रभावित करते हैं मन की तरंगे बहुत ही पावरफुल होती है सामने वालों के विचारों को भी बदल देती है। भले ही कोई हमसे विपरीत चल रहा हो पर उनके प्रति भी हमें माध्यस्थ भाव रखना है। आज की वक्र बुद्धि तर्क वितर्क ही करना जानती है। जहां भी विवाद हो वहां से हट जाना चाहिए ताकि जीवन की शांति समाधि भंग ना हो। हमें आपस में विवाद नहीं संवाद करना चाहिए ताकि समस्याओं को सुलझा सके।

पूज्य श्री प्रशस्ति श्री जी महाराज साहब ने बताया कि सुखी बनने के चार सूत्र ज्ञानी जनों ने बताए हैं पहला व्यस्त रहे, दूसरा मस्त रहे, तीसरा सुख बांटे और चौथा दुख को घटाएं। आज हमारे मन में निरंतर सुखी बनने की अभिलाषा बढ़ती जा रही है। हम जैसे-जैसे कर्म करते हैं वैसे-वैसे हम सुख दुख का अनुभव पाते हैं। हम कोई भी कार्य कर रहे हैं यदि हम उसे कार्य को एकाग्रता से ध्यान पूर्वक करेंगे तो यह हमारे कर्मों की निर्जरा का साधन भी बन सकता है।
महासतीया जी के दर्शन,वंदन,प्रवचन एवं सानिध्य का लाभ श्री मधुर मुनिजी म.सा. के सांसारिक भतीजी ऋषिका मुणोत अमन मुणोत सिवनी मालवा ने लिया। सिवनी मालवा के राजेंद्र प्रसाद कांतिलाल मुणोत परिवार द्वारा शुद्ध धार्मिक आराधना के केन्द्र विंदू खिरकिया समता भवन हेतु 5100 रुपए की राशि प्रदान की साथ ही प्रभावना का भी लाभ लिया।
धर्म सभा में संचालन नगीनचंद मेहता ने किया।

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