*रियल ज्ञान को प्राप्त करना कठिन कार्य है -साध्वी श्री प्रज्ञा श्री जी।* *हमे धर्मानुरागी बनना है – साध्वी श्री प्रेक्षा श्री जी।*









रियल ज्ञान को प्राप्त करना कठिन कार्य है -साध्वी श्री प्रज्ञा श्री जी।
हमे धर्मानुरागी बनना है – साध्वी श्री प्रेक्षा श्री जी
रिपोर्ट:,यश पांडे

खिरकिया:- दिनांक 16/07/25 दिन बुधवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की आज्ञानुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी म.सा. ठाणा 4 सुखसाता पूर्वक विराज रहे है।
साध्वी प्रज्ञा श्री जी ने कहा कि- रियल ज्ञान को प्राप्त करना सबसे कठिन कार्य है । रियल ज्ञान का तात्पर्य है आत्म -चिंतन से उपजा ज्ञान। रियल ज्ञान जब व्यक्ति को हो जाता है तो वह संसार में रचा- पचा नहीं रहता है ।उन्होंने आगे कहा कि -उभयकाल प्रतिक्रमण करने वाले जीव को यदि उत्कृष्ट रसायन आ जाए तो वह तीर्थंकर नाम गोत्र का बंध कर सकता है ।उन्होंने बताया कि -भगवान के समवशरण में नारकीय के जीवों को छोड़कर शेष 23 दंडक के जीव आते हैं । भगवान का अतिशय इतना प्रभावशील होता है कि उनके समवशरण में 25 योजन दूर तक कोई उपद्रव नहीं होता। इसके पूर्व श्री प्रेक्षा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि- हमें धर्मानुरागी बनना है ।धर्म के प्रति ऐसी गहरी श्रद्धा हो, जो की देवों को भी झुका दे। अगर हमें जिनेश्वर देवों से प्यार है तो हमें अपने धर्म के प्रति दृढ़ श्रद्धा होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि -यदि संसार सागर को पार करना है तो हमें तेरे -मेरे का भेद मिटाना होगा ।पूज्य प्रज्ञा श्री जी म. सा. के मुखारविंद से उषा नगीन मेहता ने 3 उपवास,युवा तपस्वी सुमित अशोक (टिल्लू) भंडारी छीपाबड़ एवं मौसमी अक्षय भंडारी ने दृढ़ मनोवल का परिचय देते हुए 7 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। म सा ने सभी से आव्हान किया कि 17 एवं 18 तारीख को श्रावण मास अष्टमी होने से दोनों दिन प्रवचन में 2 सामायिक एवं एकासना करने का लक्ष्य रखे। इस अवसर पर श्रावक -श्राविकाएं एवं श्रृद्धाशील गुरु भक्त उपस्थित होकर जिनवाणी रूपी प्रवचन का सुबह 9 बजे से 10 तक लाभ ले रहे है और अपनी आत्मा को हलूकर्मी बना रहे हैं।
धर्म सभा का संचालन बालिका अमीषा महेंद्र रांका ने किया।









