*प्रशंसा को पचाना कठिन है – साध्वी प्रज्ञा श्री जी* *संसार के विषय- भोग हमारी आत्मा के लिए विष्टा के समान हैं – साध्वी प्रणति श्री जी*

प्रशंसा को पचाना कठिन है – साध्वी प्रज्ञा श्री जी
संसार के विषय- भोग हमारी आत्मा के लिए विष्टा के समान हैं – साध्वी प्रणति श्री जी
रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया – दिनांक 26/07/2025 दिन शनिवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की अज्ञानुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि- प्रशंसा पाना सरल है परंतु प्रशंसा को पचाना कठिन है। व्यक्ति प्रशंसा में फुले नहीं समाता ।हमें प्रशंसा और निंदा में समभाव रखना चाहिए ।यदि हम प्रशंसा, प्रमाद और पर -परिवाद से दूर रहेंगे तो जीवन यशस्वी बन सकता है। हम झूठी प्रशंसा नहीं करें , प्रमाद नहीं करें और निंदा – विकथा से दूर रहे तो जीवन सुखमय और यशस्वी बन सकता है ।महापुरुषों की आज्ञा और निर्देश का पालन करने से प्रशंसा प्राप्त होती है । उन्होंने आगे कहा कि- जहां सरलता , सहजता रहती है वहां सुख रहेगा और जहां अन्याय- अनीति रहेगी वहां दुख ही रहेगा। इसके पूर्व श्री प्रणति श्री जी महाराज साहब ने कहा कि- संसार के काम भोगो ,विषयों के प्रति हमारी आत्मा अनुरक्त बनी हुई है यह अनुरक्ति हमें गर्त में ले जाने वाली है और संसार के विषयों के प्रति विरक्ति हमे ऊर्ध्वगामी बनाती है ।विषयों के प्रति आसक्ति होने के कारण विरक्ति की भावना उत्पन्न नहीं होती है ।बिषयों के प्रति विरक्ति के भाव निर्वेद कहलाता है। संसार के विषय -भोग हमारी आत्मा के लिए विष्टा के समान हैं। यदि आत्मा को ऊर्ध्वगामी गामी बनाना है तो हमें अपने जीवन में विरक्ति के भाव उत्पन्न करना होगा ।
धर्मसभा में संचालन अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन समता युवा संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मयूर नयन विनायक्या द्वारा किया गया।
साध्वीवर्याओं की सद प्रेरणा व पुरुषार्थ से तपस्या के क्रम में 4 उपवास प्रियंका पंकज भंडारी, 3 उपवास स्मिता महेंद्र रांका एवं रश्मि आनंद श्री श्री माल ने पचखान ग्रहण किए। इस अवसर पर श्रावक – श्राविकाएं एवं श्रद्धाशील गुरु भक्त उपस्थित थे।




