धर्म

*महापुरुष कछुए के समान होते हैं – साध्वी प्रज्ञा श्री जी* *2 सम्यक पराक्रम से ही आत्मा सिद्धत्व को प्राप्त करती है – साध्वी प्रणति श्री जी*

रिपोर्ट:यश पांडे

खिरकिया:-दिनांक 25 /07/2025 दिन शुक्रवार को समता भवन में विराजित आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब की आज्ञानुवर्ती शासन दीपिका श्री प्रज्ञा श्री जी महाराज साहब ने फ़रमाया की- फूल कांटो के बीच में ही खिलता है कांटो की चुभन महसूस नहीं करता है। कांटें हैं फिर भी उनके बीच में मुस्कुराताहै। आज हमें भी सभी प्रकार की सुख सुविधाएं तो मिली है पर फिर भी हम टेंशन में रहते हैं। जीना कब तक है यह पता नहीं पर फिर भी हमने अपने भविष्य के लिए न जाने कितनी योजनाएं बना रखी है। आज मानव के सिर पर इतना टेंशन है की गोलियां लेने के बाद भी उसे नींद नहीं आ रही। आज हम नाम के लिए काम कर रहे हैं। कोई हमारी प्रशंसा करें तो हम फूल जाते हैं प्रशंसा का झूठा जहर भी खुशी-खुशी पी लेते हैं। लोग मुंह पर तो मीठा बन जाते हैं और पीठ पीछे हमारी निंदा करते हैं। महापुरुष कछुए के समान होते हैं। जैसे कछुआ किसी आक्रमण को जानकर अपने अंगों को समेट लेता है वैसे ही महापुरुष भी इंद्रियों का गोपन करते हैं। सामान्य जन इंद्रियों के गुलाम होते हैं। आज कोई हमारे अनुकूल है हां में हां मिलता है तो हमें अच्छा लगता है। प्रतिकूल व्यक्ति हमें सुहाता नहीं है। आज जीवन में सब कुछ है पर समाधि नहीं है।

पूज्य श्री प्रणति श्री जी महाराज साहब ने फरमाया कि – अनंत पुण्य वाणी से हमें यह जैन धर्म मिला है ।जब तक हमें इस पर अटूट श्रद्धा नहीं होगी और श्रद्धा के साथ हमारा सम्यक दिशा में पराक्रम नहीं होगा हमारी आत्मा सिद्धत्व को प्राप्त नहीं कर पाएगी। प्रतिदिन नवकार महामंत्र का जाप भी प्रवर्धमान है।
म.सा. के मुखारविंद से तीन उपवास शिखा भंडारी,पुष्पा कोचर एवं अन्य गुप्त तपस्वी ने, दो उपवास रश्मि श्री श्री माल ने पचखान ग्रहण कर मनोवल का परिचय दिया।
धर्म सभा का संचालन समता युवा संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मयूर (नयन) विनाक्या ने किया। प्रतिदिन सुबह 9 बजे 10 बजे तक जिनवाणी रूपी प्रवचन का श्रावक – श्राविकाएं एवं श्रद्धा शील गुरु भक्त लाभ ले रहे है।

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