धर्म

*संसार की कोई भी शक्ति नहीं जो आपके दुःख को रोक दे केवल अपने स्वय के पुरुषार्थ से किया गया धर्म ही यह संभव है*

 

 

 

संसार की कोई भी शक्ति नहीं जो आपके दुःख को रोक दे केवल अपने स्वय के पुरुषार्थ से किया गया धर्म ही यह संभव है

रिपोर्ट;,यश पांडे

खिरकिया जिन शासन प्रभावक, जन-जन की आस्था के केंद्र , प्रखर वक्ता , परम पूज्य गुरुदेव श्री गुलाबमुनीजी म.सा. आदि ठाणा तीन समता भवन में विराजित पूज्य गुलाब मुनि जी महाराज साहब ने बताया कि शांति समाधि का तत्व धर्म है दूसरा कोई साधन नहीं है महावीर भगवान देव ने अपने जन्म मरण के चक्र में अनुभव किया है उसके बाद बताया कि सब दुखकारी है पुण्य के उदय से प्राप्त सुविधा दुखदाई है ज्ञानी भगवान ने बताया कि इस अवसर्पीणी काल में भरत चक्रवर्ती राजा ने कर्तव्य बुद्धि रखी ममत्व बुद्धि नहीं कर्तव्य बुद्धि में 5% काम हो जाएगा ममत्व बुद्धि में 100% काम बढ़ जाएगा थोड़ी सी विशेषता बढ़ जाती है तो व्यक्ति मान भूल जाते हैं गाड़ी 150 की स्पीड से चलती है पंचर हो गई तो क्या होगा हवा निकल जाएगी गाड़ी रुक जाएगी । इस प्रकार पुण्य के उदय से मिला हवा निकलते ही चल जाएगा यह सब लीज पर मिला है इसका सदुपयोग करना चाहिए दुरुपयोग नहीं कर्म सत्ता ने संसार के स्टेज पर मनुष्य के रूप में हमें भेजा है । गली के राजा श्वानचंद है और गटर के सुपरवाइजर सुअरचंद, ये बुद्धिमान करोड़पति अरबपति थे, इनको लीज पर मिला था लेकिन सदुपयोग करते नहीं आया आई और माई यह बड़ी खाई इससे मारो डाई तो मोक्ष की मिले मलाई । जहां मैं में होती है वहां मारामारी होती है यह चक्र अनंत काल से संसार में चल रहा है लोग दुख में पीछे सुख में आगे रहते हैं स्वयं के लिए कठोर और दूसरों के लिए कोमल बने ठंड में ठंडी लग रही है गर्मी में गर्मी लग रही है दुखम आरा है तो दुख तो आएगा ही दुख नहीं चाहिए तो अभी क्यों पैदा हुए पहले होना था । तुमने धंधा ही ऐसा किया किया कि कर्मसत्ता ने कहा आजा। संसार की कोई शक्ति नहीं जो अपने दुख को रोक दे हां लेकिन स्वयं की शक्ति से पुरुषार्थ से धर्म ध्यान से आराधना से इसे कम किया जा सकता है रोका जा सकता है क्योंकि तीर्थंकर की शक्ति के समान कोई नहीं है । भगवान रास्ता बता सकते हैं बदलना स्वयं को है डॉक्टर दवाई दे सकता है लेना स्वयं को है भगवान ने अनुभव के बाद बताया कि सुख समाधि शांति धर्म तत्व दे सकता है और जिसमें केवल निस्वार्थ भाव है वही बताएंगे । यह बातें केवल धर्मगुरु के द्वारा ही सुनने को मिलती है धर्म स्थानक में । जिनवाणी सुनने के लिए एक घंटा दुकान बंद की तो कोई घाटा नहीं होगा इसकी गारंटी में मेरी है । बहू बेटी को सुनना चाहिए तो वह संस्कारी बने शादी में सब जाते हैं यह दुखी होने के धंधे जो सुनवाना वह नहीं सुनवा रहे। मां-बाप का संतान के ऊपर उपकार है लेकिन वर्तमान के बच्चे कह रहे कि हमारा मां-बाप के ऊपर उपकार है हम पैदा नहीं होते तो यह बांझ रहते यह अनार्य संस्कृति है। गलत नीति का हराम का कभी पचने वाला नहीं है या तो डॉक्टर ले जाएगा यह ए बी सी डी में आ जाओगे अ से अटैक ब से ब्लड प्रेशर सी से कैंसर डी से डायलिसिस हराम का टिकने वाला नहीं है डॉक्टर से बच गए तो डाकू ले जाएगा एक आगे से चाकू लगता है दूसरा पीछे से जैसा सप्लाई करोगे वैसा रिप्लाई होगा स्वयं के प्रति कठोर और दूसरों के प्रति कोमल बने तो ही शांति और समाधि का मार्ग मिलेगा । श्री श्वेतांबर जैन श्री संघ अध्यक्ष अनिल मुणौत ने बताया पूज्य श्री के दर्शनार्थ मंडलेश्वर हाटपीपल्या चारूवा सहित अन्य स्थानों से बड़ी संख्या मे गुरुभक्त पधारे

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