*महावीर जयंती खिरकिया में धूमधाम से मनी*…. ..*इस अवसर पर श्वेताम्बर जैन समाज एवम दिगम्बर जैन समाज ने संयुक्त रूप से शहर में शोभा यात्रा निकाली*….*(देखे वीडियो)*…….*(रिपोर्ट: वरिष्ट पत्रकार सुनील जैन की कलम से)*








खिरकिया।गुरुवार को शहर में भगवान महावीर की जयंती धूमधाम से मनाई गई।इस अवसर पर श्वेतांबर एवं दिगम्बर जैन समाज ने संयुक्त रूप से शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली
रिपोर्ट:सुनील जैन (वरिष्ट पत्रकार)



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इस दौरान महावीर स्वामी की प्रतिमा ने एक आकर्षक सुसज्जित रथ में सवार होकर नगर भ्रमण किया।शहर के कॉलेज रोड स्थित दिगम्बर जैन मंदिर से निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के सदस्य शामिल हुए। महिला, पुरुष व बच्चे भजन की धुन पर थिरकते आगे बढ़ रहे थे। दिगम्बर जैन मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा ने नगर भ्रमण किया। शोभायात्रा जिनालय से पीपल चौराहा, रेलवे फाटक, गाँधीचौक, गुरुद्वारा, शनि मंदिर, मस्जिद चौराहा, मेन रोड, मंडी होते हुए वापिस जैन मंदिर पहुंची।इस दौरान समाज के लोगों ने शहर में भगवान महावीर स्वामी के संदेश जियो ओर जीने दो को जन जन तक पहुंचाया।अहिंसा का पाठ संपूर्ण विश्व को पढ़ाने वाले जैन जगत के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जी का जन्म कल्याणक दिवस महावीर जंयती समग्र जैन समाज भक्ति भाव के साथ मना रहा है। शोभायात्रा में शामिल पुरुषों के ने श्वेत वस्त्र और महिलाओं ने पीले रंग की साड़ी पहनकर समाज को भगवान महावीर स्वामी के बताएं चलने की अपील की।शोभायात्रा का अनेक स्थानों पर विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा स्वागत किया गया।इससे पहले सुबह समाज के सदस्यों ने दिगम्बर जैन मंदिर में श्रीजी का अभिषेक किया, शांति धारा, नियमित पूजन, विधान आदि सम्पन्न हुआ।शोभा यात्रा के बाद भगवान महावीर स्वामी का अभिषेक किया गया।इस अवसर पर साध्वी प्रियंका श्रीजी मसा ने महावीर जन्मकल्याणक पर अपने विशेष व्याख्यान में भगवान महावीर के जीवन और उनकी सहनशीलता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान महावीर ने अपने जीवन में कई कष्टों और उपसर्गों को सहन किया और अंततः भगवान बन गए। प्रवचन में सहनशीलता के महत्व पर जोर दिया गया।साध्वीजी ने अपने प्रवचन में भगवान महावीर के जीवन के विभिन्न भवों और उनकी यात्राओं का वर्णन किया, जिसमें उन्होंने कई चुनौतियों और कष्टों का सामना किया। प्रवचन में बताया गया है कि कैसे भगवान महावीर ने अपने जीवन में संयम और तपस्या का पालन किया और अंततः तीर्थंकर बन गए।
प्रवचन का मुख्य संदेश था कि सहनशीलता और संयम के साथ जीवन जीने से हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।







