मध्य प्रदेश

*विद्युत मंत्रालय परामर्शदात्री समिति की बैठक में सम्मिलित हुए सांसद*….*(देखे वीडियो)* *देश में बिजली की मांग के अनुरूप उत्पादन क्षमता में हो रही वृद्धि* *अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने के लिए किया जा रहा कार्य : सांसद दर्शन सिंह चौधरी*

 

 

विद्युत मंत्रालय परामर्शदात्री समिति की बैठक में सम्मिलित हुए सांसद

देश में बिजली की मांग के अनुरूप उत्पादन क्षमता में हो रही वृद्धि

अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने के लिए किया जा रहा कार्य : सांसद दर्शन सिंह चौधरी

रिपोर्टर:यश पांडे

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नई दिल्ली संसदीय सौंध में विद्युत मंत्रालय परामर्शदात्री समिति की बैठक सम्पन्न हुई। जिसमें होशंगाबाद नरसिंहपुर लोकसभा सांसद दर्शन सिंह चौधरी सम्मिलित हुए। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत और आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने की। आयोजित बैठक में “राष्ट्रीय विद्युत योजना – पारेषण” पर चर्चा हुई ।

होशंगाबाद नरसिंहपुर लोकसभा सांसद एवं विद्युत मंत्रालय परामर्शदात्री समिति सदस्य दर्शन सिंह चौधरी ने बताया कि पिछले दशक में शहरी क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता 22 घंटे से बढ़कर 23.4 घंटे हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 12.5 घंटे से बढ़कर 22.4 घंटे हो गई है। सांसद चौधरी ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत संकल्प की पूर्ति के लिए देश के विकास में बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है।

देश में विद्युत की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त उत्पादन के लिए कार्य किया जा रहा है जिसमें फरवरी, 2025 (470 गीगावाट) उत्पादन से मार्च, 2032 (900 गीगावाट) उत्पादन के लक्ष्य को लेकर योजना तैयार की गई है। गाडरवारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 800 मेगावाट क्षमता वाली दो नई परियोजनाओं पर भी कार्य चल रहा है। चौधरी ने बताया कि आज देश में सौर ऊर्जा से 22%विद्युत उत्पादन किया जा रहा है जिसे वर्ष 2032 में 40% तक पहुंचने को लेकर कार्य किया जा रहा है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में विद्युत एक महत्वपूर्ण घटक है। राष्ट्रीय विद्युत योजना वर्ष 2023 से 2032 की अवधि के दौरान देश में जोड़े जाने वाली आवश्यक विद्युत पारेषण प्रणाली का विवरण प्रदान करती है, जो देश में उत्पादन क्षमता वृद्धि और बिजली की मांग में वृद्धि के अनुरूप है। पर्याप्त विद्युत पारेषण प्रणाली की उपलब्धता से उत्पादन क्षमता का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है, जो एक विश्वसनीय बिजली प्रणाली की आवश्यकता है। एनईपी-पारेषण के अनुसार, दस साल की अवधि (2023 से 2032) के दौरान लगभग 1.91 लाख सीकेएम विद्युत पारेषण लाइनें और 1274 जीवीए परिवर्तन क्षमता जोड़ने की योजना है।

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