*भगवान ऋषभदेव की जयंती मनाई गई*





भगवान ऋषभदेव की जयंती मनाई गई
पत्रकार:यश पांडे

खिरकिया।दिगंबर जैन समाज द्वारा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की जयंती रविवार को मनाई गई।इस दौरान सुबह श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई, जो दिगंबर जैन मंदिर से शुरू होकर मेन रोड, मंडी होते हुए वापस मंदिर में पंहुची। मंदिर में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, सामूहिक पूजन हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्य नीलेश एवं नीतेश जैन भाइयों को प्राप्त हुआ। शाम को 48 दीपों के साथ भगवान ऋषभदेव की स्तुति में रचित भक्तांबर स्त्रोत का पाठ किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
दिगंबर जैन महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती मंजू जैन ने बताया कि अयोध्या के राजा नाभिराज के पुत्र ऋषभ अपने पिता की मृत्यु के बाद राज सिंहासन पर बैठे और उन्होंने कृषि, शिल्प, असि (सैन्य शक्ति ), मसि (परिश्रम), वाणिज्य और विद्या इन छह आजीविका के साधनों की विशेष रूप से व्यवस्था की तथा देश व नगरों एवं वर्ण व जातियों आदि का सुविभाजन किया। उन्होंने बताया कि उनके दो पुत्र भरत और बाहुबली तथा दो पुत्रियां ब्राह्मी और सुंदरी थीं। जिन्हें उन्होंने समस्त कलाएं व विद्याएं सिखाई। उन्होंने शारीरिक और मानसिक क्षमताओं के साथ लोगों को श्रम करना सिखाया। इससे पूर्व लोग प्रकृति पर ही निर्भर थे।









