*1.श्रेय मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ मार्ग है – तेजकुमार तांतेड़।*…. *2. वाणी जोड़ने और तोड़ने दोनों काम करती है – किरण चंडालिया।*… *3.जीवन में सरलता को अपनाऍं-रुपेश भंडारी।*





1.श्रेय मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ मार्ग है – तेजकुमार तांतेड़।
2. वाणी जोड़ने और तोड़ने दोनों काम करती है – किरण चंडालिया।
3.जीवन में सरलता को अपनाऍं-रुपेश भंडारी।
रिपोर्टर:यश पांडे

खिरकिया-: फाल्गुनी (होली) चातुर्मासिक पर्व आराधना के सुअवसर पर समता भवन खिरकिया मे जिनवाणी का अमृत रसपान कराते हुए इंदौर से पधारे वरिष्ठ स्वाध्यायी तेजकुमार तांतेड़ ने कहां की – मानव जीवन अनमोल है। इसे श्रेष्ठ बनाने के लिए हमें श्रेय मार्ग का अनुशरण करना पड़ेगा। 18 पापों का त्याग करना, अहंकार नहीं करना,श्रावक के 12 व्रतों को धारण करना,सत्य – अहिंसा – अचोर्य – ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह ये श्रेय मार्ग के अंतर्गत आते हैं। श्रेय मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ मार्ग है बाकी के सभी मार्ग तुच्छ है। प्रिय मार्ग संसारी मार्ग है,भौतिक सुख सुविधाओं का मार्ग है। इससे जीवन कभी भी श्रेष्ठ नहीं बन सकता। उन्होंने आगे कहा कि – जीवन में सफलता तभी मिलती है जब हमारा लक्ष्य निर्धारित हो। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकाग्रता का आना जरूरी है। अतः हमें श्रेय मार्ग अपनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि – धन ,परिग्रह कोयले के समान है और यह शरीर भी मिट्टी में मिलने वाला है अतः हमें जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए।इससे पूर्व वरिष्ठ स्वाध्यायी किरण चंडालिया ने कहा की- अनंता – अनंत पुण्यवाणी से हमें पाच इंद्रियां मिली है। इन पांचों इंद्रियों में रसना इंद्रीय प्रधान है। क्योंकि वाणी जोड़ने और तोड़ने दोनों काम करती है अतः हमें हमेशा मधुर और मीठी वाणी बोलना चाहिए। मीठा बोलने से संबंध संवरते हैं और अच्छा खाने से जीवन संवरता है। वाणी का प्रभाव अमिट होता है। अतः हमें वाणी का सदुपयोग करना चाहिए दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। इसके बाद खिरकिया गौरव लिटिल मास्टर रूपेश भंडारी ने कहा कि – मोक्ष को प्राप्त करने का सबसे सरलतम मार्ग हैं – जीवन में सरलता को अपनाना है। जीवन में सरलता तभी आएगी जब हम धर्म की शरण को स्वीकार करेंगे। कषायो को जीवन से दूर करके भी जीवन में सरलता लाई जा सकती है। कषाय याने क्रोध, मान,माया, लोभ, राग, द्वेष आदि इस अवसर पर सैकड़ो श्रावक श्राविकाए एवं श्रद्धाशील उपासक उपस्थित थे। कई त्याग प्रत्यखान भी हुए।
अखिल भारत वर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के अंतर्गत समता प्रचार संघ से पधारे तीनों स्वाध्यायी बंधुओं का बहुमान श्री संघ के सदस्य निर्मल विनायक्या एवं आशीष समदड़िया द्वारा भावों से किया गया।
श्री संघ के सदस्य एवं गुरु भक्त स्वाध्यायी बंधुओं का बहुमान करते हुए।









