धर्म

*खिरकिया में जन्मे मनीष समदड़िया दीक्षा पश्चात नाम मधुर मुनिजी महाराज साहब का २१ वा दीक्षा दिवस मनाया।*….. *धर्म की राह:- ४ फरबरी २००४ को झीलों की नगरी उदयपुर में आचार्य श्री रामलालजी महाराज साहब ने १५दीक्षा प्रदान की उसमें मनीष समदड़िया को दीक्षा प्रदान कर नया नाम श्री मधुर मुनि जी म.सा.रखा।*

 

 

 

खिरकिया में जन्मे मनीष समदड़िया दीक्षा पश्चात नाम मधुर मुनिजी महाराज साहब का २१ वा दीक्षा दिवस मनाया।

धर्म की राह:- ४ फरबरी २००४ को झीलों की नगरी उदयपुर में आचार्य श्री रामलालजी महाराज साहब ने १५दीक्षा प्रदान की उसमें मनीष समदड़िया को दीक्षा प्रदान कर नया नाम श्री मधुर मुनि जी म.सा.रखा।

खिरकिया में जन्मे श्री मधुर मुनीजी महाराज साहब का सोमवार को 21 वा दीक्षा दिवस मनाया गया इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए मधुर मुनि जी महाराज साहब का जन्म 19 सितंबर 1978 को खिरकिया में प्रतिष्ठित किराना व्यवसायी पिता कमलचंद समदड़िया माता सुषमा समदड़िया के मंजिलें पुत्र के रूप में हुआ आपने 26 वर्ष की आयु में आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब से उदयपुर में संयम ग्रहण किया था खिरकिया नगर से प्रथम दीक्षा आपकी ही हुई थी।ज्ञातव्य है आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब जिनका 50 वा संयम स्वर्ण दीक्षा महत्तम महोत्सव 9 फरबरी को आने जा रहा है। इसके पूर्व पूरे देश में धार्मिक सामाजिक गतिविधियों के साथ कई आयामो प्रकल्पों के साथ मनाया जा रहा है।आज गुरु दर्शन की अभिलाषा के भाव लिए श्री विनय मुनिजी महाराज साहब एवं श्री मधुर मुनिजी महाराज साहब आदि ठाणा की दर्शन की अभिलाषा नोखा प्रवेश के साथ पूर्ण हुई।
आज खिरकिया समता भवन में 2 बजे से 3 बजे तक नवकार महामंत्र का जाप संपादित हुआ। कई श्रावक श्राविकाओं तप त्याग से दिवस को मनाया विशेष रूप से सधर्मी गुरुभक्त मोहन जी सोनी ने परिपूर्ण पौषध कर दृढ़ मनोवल का परिचय दिया।ऐसे दृढ़धर्मी,प्रियधर्मी क्रियानिष्ठ गुरुभक्तो से हुक्म संघ गौरवान्वित है।
कालधड़ गांव जहां एक भी जैन समाज का घर नहीं वहां किया था चातुर्मास।

श्री विनय मुनिजी जी महाराज साहब और श्री मधुर मुनि जी महाराज साहब ने वर्ष 2015 में छोटे से गांव कालधड़ में चातुर्मास कर एक अनूठा आयाम प्रस्तुत किया था खास बात यह है कि कालधड़ गांव में जैन समाज का एक भी घर नहीं है चातुर्मास कर अहिंसा मय जैन धर्म का गौरव बढ़ाया मधुर मुनिजी महाराज साहब ने मध्य प्रदेश में खिरकिया ,हरदा,खंडवा, इंदौर बालाघाट ,जावद,आदि जगहों के अलावा छत्तीसगढ,म्हाराराष्ट्र, राजस्थान आदि कई राज्यों में के क्षेत्र में चातुर्मास किया।

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